बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता फैलाने के लिए जाने जाने वाले संगठनों ने अब देश के सबसे बड़े सेवा भावी संगठनों में से एक ‘इस्कॉन’ (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) पर बैन लगाने की माँग की है। जुमे की नमाज के बाद ढाका और चटगाँव जैसे शहरों में हिफाजत-ए-इस्लाम और इंतिफादा बांग्लादेश जैसे कट्टरपंथी संगठनों ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया।
ये संगठन इस्कॉन पर हमला बोलते हुए उसे ‘चरमपंथी हिंदुत्व संगठन’ बता रहे हैं, जबकि इस्कॉन 1970 के दशक से बाढ़ और युद्ध के दौरान लाखों लोगों को भोजन कराता आया है। यह चौंकाने वाली माँग ऐसे वक्त में आई है, जब शेख हसीना सरकार गिरने के बाद से इस्कॉन मंदिरों और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। वहीं, मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने भी हाई कोर्ट में इस्कॉन को ‘धार्मिक कट्टरपंथी संगठन’ कहकर इन माँगों को और हवा दे दी है।
ढाका में अल-कायदा से जुड़े आतंकी ने की ‘बैन’ की वकालत
जानकारी के अनुसार, ढाका की बैतुल मुकर्रम मस्जिद के बाहर इंतिफादा बांग्लादेश ने प्रदर्शन किया। इस कट्टरपंथी समूह ने सरकार के सामने छह माँगें रखी हैं, जिनमें इस्कॉन पर बैन लगाना और जाँच शुरू करना मुख्य है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस माँग का समर्थन अल-कायदा से जुड़े अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) के प्रमुख जसीमुद्दीन रहमानी ने किया।
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार द्वारा हाल ही में रिहा किए गए इस आतंकी ने इस्कॉन को ‘चरमपंथी यहूदी संगठन’ बताया, जबकि वह एक वैश्विक हिंदू संगठन है। रहमानी ने इस्कॉन पर बैन लगाने को ‘समय की माँग’ करार दिया। वहीं, इंतिफादा के सदस्य अहमद रफीक ने सरकार पर हमलावरों को बचाने का आरोप लगाया, जब इस्कॉन के खिलाफ बोलने वाले एक इमाम का कथित तौर पर अपहरण कर उन्हें पीटा गया था। चटगाँव में हिफाजत-ए-इस्लाम ने भी रैली की और इस्कॉन को ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित करने की माँग की। यह विडंबना है कि शांति भंग करने वाले संगठन अब देश की शांति के लिए ‘इस्कॉन’ पर बैन लगाने की बात कह रहे हैं।
हसीना सरकार के बाद इस्कॉन पर हमला, झूठे आरोपों में नेता जेल में
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से ही इस्कॉन और हिंदू समुदाय पर विरोध और हमले तेज हो गए हैं। इस दौरान इस्कॉन के कई मंदिरों और केंद्रों में तोड़फोड़ की गई। हिंदू समुदाय के प्रमुख नेता कृष्ण दास प्रभु अब भी झूठे मामलों में जेल में हैं।
कट्टरपंथी संगठन लगातार इस्कॉन पर जमीन हड़पने, मनी लॉन्ड्रिंग और चरमपंथी गतिविधियों जैसे गंभीर झूठे आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों के चलते, बांग्लादेश फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (BFIU) ने पहले मनी लॉन्ड्रिंग के शक में इस्कॉन के 17 सदस्यों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे। यह सब दिखाता है कि किस तरह एक सेवा भावी संगठन को राजनीतिक दुर्भावना के तहत लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
इस्कॉन का सेवा कार्य
इस्लामिक संगठनों के दावों के विपरीत, इस्कॉन 1970 के दशक से बांग्लादेश में निस्वार्थ सेवा कर रहा है। इस्कॉन ने 1971 के मुक्ति संग्राम और बार-बार आने वाली बाढ़ के बाद अपने ‘फूड फॉर लाइफ’ कार्यक्रम से लाखों लोगों को खाना खिलाया। इस्कॉन धर्म की परवाह किए बिना गरीब बच्चों के लिए स्कूल, अनाथालय और वृद्धाश्रम चलाता है। इस्कॉन मुफ्त मेडिकल कैंप भी आयोजित करता है। इस्कॉन पर हमले और बैन की माँग से पता चलता है कि देश की राजनीति पर इस्लामी समूहों का प्रभाव बढ़ रहा है।

