बांग्लादेश में इस हफ्ते प्रेस की आजादी पर अब तक का सबसे बड़ा हमला हुआ है। ढाका में उग्र भीड़ ने देश के दो सबसे बड़े अखबारों, ‘प्रथम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ के दफ्तरों पर हमला बोल दिया। वहाँ जमकर लूटपाट की गई, फर्नीचर जला दिया गया और तोड़फोड़ की गई। हालत इतने खराब थे कि 27 साल के इतिहास में पहली बार ‘प्रथम आलो’ को अपना काम पूरी तरह बंद करना पड़ा। पत्रकारों ने अपनी जान बचाने के लिए घंटों छतों पर छिपकर समय बिताया।
दफ्तर में तबाही और लूटपाट
जानकारी के अनुसार, देर रात सवा बारह बजे के करीब भीड़ ने दफ्तर पर ईंट-पत्थर चलाने शुरू कर दिए। काँच तोड़कर उपद्रवी अंदर घुस गए और फर्नीचर, जरूरी कागजात और मशीनें इकट्ठा करके उनमें आग लगा दी।
हमलावर सिर्फ तोड़फोड़ तक नहीं रुके, उन्होंने दफ्तर से 150 से ज्यादा कंप्यूटर, लैपटॉप, नकदी और कर्मचारियों का निजी सामान लूट लिया। CCTV कैमरे तोड़ दिए गए ताकि सबूत न बचें। आग इतनी भयानक थी कि दमकल की गाड़ियाँ भी समय पर नहीं पहुँच पाईं।
छत पर छिपे पत्रकार, धुएँ में घुटा दम
‘प्रथम आलो’ के बाद भीड़ ‘द डेली स्टार‘ के दफ्तर पहुँची। वहां मौजूद 28 पत्रकारों और कर्मचारियों ने जान बचाने के लिए छत की ओर दौड़ लगाई और खुद को लॉक कर लिया। नीचे भीड़ तांडव कर रही थी और ऊपर धुएँ की वजह से पत्रकारों का दम घुट रहा था।
वे इतने डरे हुए थे कि उन्होंने क्रेन से नीचे उतरने से भी मना कर दिया क्योंकि नीचे हमलावर मौजूद थे। बाद में सेना के एक अधिकारी ने उन्हें वहाँ से सुरक्षित बाहर निकाला।
इतिहास में पहली बार काम ठप
बांग्लादेश के मीडिया जगत के लिए यह काला दिन था। ‘प्रथम आलो’ के 27 साल और ‘द डेली स्टार’ के 33 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि बिना किसी छुट्टी के अखबार का काम रोकना पड़ा।
सिर्फ ढाका ही नहीं, बल्कि कुश्तिया, खुलना और सिलहट जैसे शहरों में भी अखबार के दफ्तरों पर हमले हुए। प्रेस ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए सबसे बुरा दौर बताया है।
हमले की शुरुआत कैसे हुई?
यह सब गुरुवार (18 दिसंबर 2025) रात को शुरू हुआ जब एक युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। रात करीब सवा ग्यारह बजे 30-35 लोगों की भीड़ ‘प्रथम आलो’ के दफ्तर पहुँची।
पुलिस ने पहले उन्हें रोका, लेकिन भीड़ ने वहाँ नारेबाजी शुरू कर दी और दफ्तर जलाने की धमकियाँ देने लगे। सोशल मीडिया पर विदेशों से भी उकसाने वाले पोस्ट डाले गए, जिससे भीड़ बढ़ती गई।

