दूसरी घटना कुश्तिया में हुई, जहाँ इस्लाम के अपमान के आरोप में भीड़ ने स्कूल शिक्षक और मौलवी शमीम रजा जहांगीर की हत्या कर दी। हमलावरों ने उनके ‘दरबार’ में आग लगा दी और उनके सात अनुयायियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
मुस्लिम युवक रकीब हसन पर भी इस्लाम के अपमान का आरोप लगाया गया कर भीड़ ने हत्या की, लेकिन उसकी हत्या का आरोप हिन्दुओं पर जड़ दिया। दोनों घटनाओं को लेकर पश्चिमी कुश्तिया और उत्तर-पश्चिमी रंगपुर में मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं की दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की।
पुलिस ने दावा किया कि रकीब हसन की हत्या से पुलिस का ध्यान हटाने के लिए साजिशन हिन्दुओं को टारगेट किया गया है।
प्रोथोम अलो अखबार ने कहा कि हिंदू समुदाय के सौ से ज्यादा लोग दासपारा बाजार इलाके में रहते हैं, जहाँ हसन की कथित तौर पर ड्रग पेडलर मोहम्मद मोमिन ने झगड़ा हुआ था, उसके बाद रकीब की हत्या हुई थी।
अखबार ने कहा कि रिपोर्टरों को मोमिन का घर खाली मिला, क्योंकि वह छिप गया था। पुलिस ने कहा कि मृतक युवक के परिवार ने कहा कि हिंदू समुदाय का उसकी हत्या से कोई लेना-देना नहीं है।
हसन की अम्मी नूरजहाँ बेगम ने लोकल रिपोर्टर्स से कहा, “हमें उनसे (हिंदुओं से) कोई दिक्कत नहीं है।” रंगपुर के पुलिस कमिश्नर मोहम्मद मजीद अली ने रिपोर्टर्स से कहा कि हम असली हत्यारों का पता लगा रहे हैं। हमने यह भी पहचान लिया है कि हिंदू घरों और दुकानों में किसने तोड़फोड़ की है।

