बांग्लादेश की यूनुस सरकार एक बार फिर इस्लामी संगठनों के दबाव में झुक गई है। सरकार ने सरकारी प्राथमिक स्कूलों में संगीत और खेल शिक्षकों की नियुक्ति का फैसला वापस ले लिया है। कट्टरपंथियों ने इसे ‘इस्लाम विरोधी एजेंडा’ बताया था। यह कदम दिखाता है कि बांग्लादेश में अब नीतियाँ नहीं, बल्कि कट्टरपंथी संगठनों की मर्जी चल रही है।
यूनुस सरकार का यू-टर्न
बांग्लादेश के शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब सरकारी स्कूलों में संगीत और शारीरिक शिक्षा के शिक्षक नहीं रखे जाएँगे। कुछ महीने पहले ही सरकार ने इन पदों को मंजूरी दी थी, लेकिन इस्लामी संगठनों के कड़े विरोध के बाद फैसला बदल दिया गया। मंत्रालय के अधिकारी ने दबाव की बात से बचते हुए कहा, “आप खुद देख लीजिए।”
जमात-ए-इस्लामी, हिफाजत-ए-इस्लाम और कई मजहबी संगठनों ने युनूस सरकार को खुली चेतावनी दी थी कि अगर संगीत और खेल की पढ़ाई जारी रही तो वे सड़कों पर उतरेंगे। उनका दावा था कि यह फैसला बच्चों को ‘धर्म से दूर करने’ की कोशिश है। कट्टरपंथी नेताओं ने यहाँ तक कहा कि ‘संगीत पढ़ाने वाले शिक्षक बच्चों को बेअदब और चरित्रहीन बनाएँगे।’
महिलाओं के सुधार पर भी पीछे हटी थी यूनुस सरकार
यह पहली बार नहीं है जब यूनुस सरकार ने इस्लामी दबाव में झुकाव दिखाया है। कुछ महीने पहले महिलाओं के अधिकारों पर बनी सुधार समिति को भी कट्टरपंथियों के विरोध के बाद भंग कर दिया गया था। तब भी इस्लामी संगठनों ने धमकी दी थी कि अगर सरकार ने सुधार लागू किए, तो उसके नेताओं को ‘भागने का मौका नहीं मिलेगा।’
शेख हसीना के हटने के बाद बांग्लादेश में इस्लामी ताकतें फिर से सिर उठा रही हैं। पहले जो संगठन सीमित थे, अब वे सरकार की नीतियांँ तय करने लगे हैं। यूनुस सरकार के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि बांग्लादेश में धर्मनिरपेक्ष शिक्षा और सांस्कृतिक आजादी खतरे में है।

