‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिमचंद्र चटर्जी के घर को बंगाल सरकार ने बना दिया पुस्तकालय, पर 20 साल से नहीं हुई मरम्मत: रिपोर्ट, परिजन बोले- ममता सरकार ने हमें भुला दिया

वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। लेकिन इसके लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की यादों को संजोए बंगाल स्थिति उनका मकान खंडहर में तब्दील हो गया है।

दैनिक भास्कर के मुताबिक, 20 साल पहले जब बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी और बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री थे, उस वक्त इसके मरम्मती का काम हुआ था। यहाँ उस वक्त लाइब्रेरी चलती थी, लेकिन ममता सरकार के आने के बाद इसका मरम्मत नहीं करवाया गया। जो लाइब्रेरी पहले चलती थी और लोगों का हुजूम यहाँ लगा रहता था, वह बंद हो गया।

कोलकाता के 5 प्रताप चटर्जी स्ट्रीट पर ये मकान बना हुआ है। दैनिक भास्कर के मुताबिक, जब उनकी टीम यहाँ पहुँची तो उन्होंने देखा कि गंदगी पड़ी हुई थी और गेट के बाहर कचरे का ढेर लगा था। आसपास की इमारतें भी खस्ताहाल में थी। हालाँकि लाइब्रेरी खुलता है लेकिन कोई आता नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की तरफ से कोई नहीं आता है और आसपास के लोग ही जरूरत पड़ने पर सफाई कर देते हैं।

बीजेपी ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर यहाँ कार्यक्रम आयोजित किया था। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदू अधिकारी भी आए थे, लेकिन गेट खोलने की इजाजत प्रशासन ने नहीं दी। यहाँ तक की लाइब्रेरी भी बंद कर दी गई थी। स्थानीय व्यक्ति ने यहाँ तक दावा किया कि कार्यक्रम को लेकर सड़क तोड़ दिया गया था। कार्यक्रम के बाद फिर से इसे बनाया गया है।

इस मामले में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की पाँचवीं पीढ़ी के सजल चट्टोपाध्याय से बात करने पर पता चला कि वे लोग कोलकाता के शोभा बाजार में रहते हैं। वे लोग काफी दिनों से पुश्तैनी मकान के रखरखाव का सवाल सरकार के सामने उठा रहे हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा। उनका कहना है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ज्यादातर संपत्ति देश की धरोहर में शामिल है, लेकिन आज की स्थिति ऐसी है कि उनके वंशजों को कोई पूछता नहीं है।

उनका कहना है कि जो बंगाल में रहते हैं, न तो सरकार ये जानती है और न ही कभी उन्हें याद करती है। सरकार ने कभी जानने की कोशिश नहीं कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज कहाँ रहते हैं। उन्हें इसका बेहद दुख है।

उनका कहना है कि जब लेफ्ट की सरकार थी, तो लाइब्रेरी हमेशा चलती रहती थी और मरम्मत भी होती रहती थी। अब ममता सरकार में ये बंद रहती है। कोई साफ-सफाई करने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय बीजेपी नेता शुभेंदू अधिकारी आए थे और इसे खुलवाने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुला।

उन्होंने सरकार से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के नाम पर विश्वविद्यालय खोलने की माँग केन्द्र सरकार से की है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहल की वजह से आज वंदे मातरम् गीत का इस्तेमाल हर कोई कर रहा है। अब आने वाली पीढ़ी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को जानें, इसके लिए जरूरी है कि उनके मकान का जीर्णोद्धार हो।