पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR ड्यूटी पर तैनात सात न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सुप्रीम कोर्ट को शुरुआती रिपोर्ट सौंपी है। सोमवार (06 अप्रैल 2026) को कोर्ट ने मामले में सुनवाई की, इस दौरान कोर्ट ने स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज 12 FIR की जाँच NIA को सौंप दी है। कोर्ट ने यह निर्देश स्थानीय पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए दिए।
दरअसल, 01 अप्रैल 2026 को मालदा जिले के कालियाचक गाँव में आधी रात को सात न्यायिक अधिकारियों को 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। इस मामले में कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और 02 अप्रैल 2026 को चुनाव आयोग को निर्देश दिए कि मामले में CBI या NIA द्वारा जाँच कराई जाए। अब 06 अप्रैल 2026 को NIA की जाँच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कोर्ट ने माना कि बंगाल पुलिस के खिलाफ आरोप गंभीर हैं।
कोर्ट ने कहा, “स्थानीय पुलिस के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। इन 12 FIR की जाँच NIA को सौंपी जाए, चाहे ये FIR किसी भी अपराध के तहत दर्ज की गई हों।” कोर्ट ने NIA को यह भी छूट दी कि अगर जाँच के दौरान पाया गया कि अपराध उससे भी ज्यादा संगीन है, जितना दिख रहा है या इसमें कई और व्यक्ति भी शामिल हैं, तो NIA खुद भी अतिरिक्त FIR दर्ज कर सकती है। इस दौरान कोर्ट समय-समय पर NIA से अपडेट रिपोर्ट लेती रहेगी।
बता दें कि मामले में दर्ज की गई 12 FIR में 24 आरोपितों की पहचान उपद्रवी तत्वों के रूप में की गई है, जिनमें से 5 का आपराधिक इतिहास है और 24 TMC के सदस्य हैं। कुल मिलाकर इस मामले में अब तक 432 व्यक्तियों की पहचान की गई है औऱ कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विवरण भी है।
NIA की रिपोर्ट में जानकारी, 1500 की भीड़ ने किया हमला
NIA ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की शुरुआती रिपोर्ट में बेहद गंभीर और चौंकाने वाले खुलासे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि 72 घंटे तक चली जाँच में साफ संकेत मिले हैं कि यह पूरी तरह से योजनाबद्धऔर समन्वित तरीके से किया गया हमला था। CNN के पत्रकार राहुल रविशंकर ने NIA की इस रिपोर्ट की हाईलाइट दी हैं।
घटना की जड़ में चुनावी मतदाता सूची के SIR के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन को बताया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रहा है। इसी विरोध के दौरान 01 अप्रैल 2026 को मालता के कालियाचक-II BDO कार्यालय में करीब 1500 लोगों की भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को 13 घंटे से ज्यादा समय तक अंदर घेरकर रखा। हालात इतने बिगड़ गए कि एक महिला न्यायिक अधिकारी को करीब 8 घंटे तक सड़क जाम करके अवैध रूप से रोके रखा गया।
NIA DECODES THE BENGAL "IN-SIR-GENCY"
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) April 6, 2026
BREAKING:
1/NIA submits explosive preliminary report to Supreme Court on Malda judicial gherao.
2/ 72-hour probe flags a coordinated escalation targeting the judiciary.
3/ Trigger: Protests against Special Intensive Revision (SIR) of…
जब देर रात इन अधिकारियों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई, तो हालात और हिंसक हो गए। न्यायिक अधिकारियों के काफिले पर सुनियोजित तरीके से पथराव किया गया। इस हमले में एक एस्कॉर्ट वाहन के ड्राइवर के सिर में गंभीर चोट आई, जिसके कारण गाड़ी पलट गई। NIA की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए लोगों को पहले से ही इकट्ठा किया गया था। इसके लिए ई-रिक्शा और स्थानीय नेटवर्क के जरिए घोषणा कर भीड़ जुटाई गई थी।
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है, जिसमें भीड़ के सामने महिलाओं को रखा गया और उनके पीछे पुरुषों को तैनात किया गया, जिससे पुलिस और प्रशासन के लिए कार्रवाई करना और मुश्किल हो गया। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ी चूक सामने आई है। कुल 16 में से 9 सीसीटीवी कैमरे खराब थे, जिनमें मुख्य गेट का कैमरा भी शामिल था।

