महुआ मोइत्रा का बदला? जिनको टीएमसी MP ने दी FIR की धमकी, उनसे 4 महीने पुराने केस का इस्तेमाल कर पर्सनल डिटेल माँग रही बंगाल पुलिस

पश्चिम बंगाल की पुलिस ने उन सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन्हें हाल ही में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर ट्रोल करने को लेकर FIR की धमकी दी थी। यह ट्रोलिंग कथित तौर पर लीक हुए चैट स्क्रीनशॉट्स को लेकर की गई थी।

‘पॉलिटिकल कीड़ा’ जैसे चर्चित सोशल मीडिया अकाउंट चलाने वाले अंकुर सिंह को एक्स की ओर से एक ईमेल मिला है। इस ईमेल में बताया गया कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने उनके अकाउंट से जुड़ी जानकारी माँगी है, जिसमें अकाउंट से जुड़ा मोबाइल नंबर, जीमेल आईडी और आखिरी आईपी लोकेशन शामिल है।

उस ईमेल में दो अटैचमेंट शामिल थे। एक नोटिस था, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत ‘एक्स’ को भेजा गया था। दूसरा अटैचमेंट उस FIR से जुड़ी जानकारी का था, जिसके लिए यह विवरण माँगा गया था। अंकुर के लिए यह बेहद चौंकाने वाला था, क्योंकि जिस FIR के तहत उनसे और अन्य सोशल मीडिया यूजर्स से जुड़ी जानकारी माँगी गई थी, वह अक्टूबर 2025 में हुई एक हत्या के मामले से संबंधित थी।

सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में अंकुर ने पश्चिम बंगाल की कानून व्यवस्था को ‘मजाक’ बताया। उन्होंने लिखा, “महुआ जानती हैं कि अगर इस मामले में सही तरह से केस दर्ज किया गया, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। इसी वजह से उन्होंने बंगाल के DGP से कहकर उनके और दूसरे लोगों के नाम एक हत्या के मामले में जोड़ दिए, जो अक्टूबर 2025 में हुआ था।”

अंकुर ने आगे कहा, “यह मामला बंगाल में 4 महीने पहले हुए अपहरण और हत्या से जुड़ा है। मैं पिछले 25 सालों में कभी बंगाल नहीं गया। इस मामले में जिनका भी जिक्र है, मैं उन्हें नहीं जानता। और उन्हें इसमे जीमेल और एक्स के आईपी डिटेल्स की क्या जरूरत है? क्या हमने ट्वीट के जरिए अपहरण और हत्या की? जब बंगाल के DGP खुद ऐसे फर्जी मामले दर्ज कर रहे हैं, तो आप बंगाल पुलिस से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?”

दिलचस्प बात यह है कि 05 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्ट में महुआ मोइत्रा ने अंकुर, तनिषा, फौजदार 15, सैफ्रनहॉक और कुछ अन्य लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स के स्क्रीनशॉट साझा किए थे। इन पोस्ट में उन्होंने कहा था कि उन्होंने इन सभी के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। इसके बाद 7 फरवरी को पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से नोटिस जारी किया गया।

(फोटो साभार: X)

बंगाल पुलिस ने जिस मामले में डिटेल माँगी, क्या है वो केस?

ऑपइंडिया ने उस मामले के बारे में जानकारी जुटाई, जिसके तहत पश्चिम बंगाल पुलिस ने अंकुर और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़ी डिटेल्स माँगी थी। 31 अक्टूबर 2025 को देबाशीष कमिला ने अपने साले की कथित हत्या के बाद बिधानगर साउथ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रशांत बर्मन और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहित (BNS) की धाराओं 103(1), 140(3), 238, 303(2) और 61(2) के तहत FIR दर्ज की थी।

शिकायतकर्ता ने बताया कि उनके साले कोलकाता में एक सुनार के तौर पर काम करते थे। आरोप है कि कुछ लोग, जिन्होंने खुद को सरकारी अधिकारी बताया था, उनके कार्यस्थल के बाहर से उन्हें अपने साथ ले गए थे। इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को BDO बताते हुए अपना नाम प्रशांत बर्मन बतााय था। इसके बाद उनके साले कभी घर वापस नहीं लौटे।

अगले दिन न्यू टाउन इलाके में एक नहर से उनके साले से मेल खाता एक शव बरामद किया गया। शिकायतकर्ता को शक है कि जिन लोगों ने उन्हें अपने साथ ले जाया था, उन्होंने ही उनकी हत्या कर शव को नहर में फेंक दिया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जाँच की माँग की है।

प्रशांत बर्मन ने निचली अदालत से अग्रिम जमानत हासिल कर ली थी, लेकिन पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस जमानत को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद हाई कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी। इसके बाद बर्मन ने सु्प्रीम कोर्ट का रुख किया। 20 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया और 23 जनवरी 2026 से पहले आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।

यह मामला पूरी तरह स्थानीय था और जैसा कि अंकुर ने कहा है, वे पिछले 25 सालों में कभी भी पश्चिम बंगाल नहीं गए हैं। पुलिस ने जिन अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स की डिटेल्स माँगी है, उनमें सूरजित दासगुप्ता, तनिषा वशिष्ठ, फौजदार15 और सैफ्रनहॉक शामिल हैं।

ऑपइंडिया से बातचीत में अंकुर ने कहा कि जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स को निशाना बनाया गया है, वे सभी अलग-अलग राज्यों के लोगों के हैं, जिन्होंने सिर्फ TMC की एक नेता के बारे में पोस्ट किया था। उन्होंने कहा कि उनका पश्चिम बंगाल से कोई लेना-देना नहीं है, और न ही किसी अपहरण या हत्या जैसे स्थानीय मामले से उनका कोई संबंध है।

अंकुर ने आगे कहा कि अगर किसी TMC नेता पर पोस्ट करने की वजह से उन्हें इस तरह घसीटा जा रहा है, तो ऐसा लगता है कि अब ट्वीट्स को भी गंभीर आपराधिक जाँच से जोड़ दिया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि किसी को यह जरूर रिसर्च करनी चाहिए कि आखिर कौन-सी तकनीक सोशल मीडिया पोस्ट को अपहरण और हत्या में बदल सकती है।

चैट लीक केस

हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ चैट के स्क्रीनशॉट वायरल हुए थे। इनको लेकर दावा किया गया था कि यह बातचीत महुआ मोइत्रा और जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर के बीच की है। इसके बाद TMC की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कहा था कि उन्होंने अंकुर सिंह, सूरजित दासगुप्ता, तनिषा वशिष्ठ, फौजदार15 और सैफ्रनहॉक जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

अब इन सोशल मीडिया अकाउंट्स के नाम पश्चिम बंगाल पुलिस ने अक्टूबर 2025 में हुए अपहरण और हत्या के मामल से जोड़ दिए हैं। पुलिस ने इस मामले में इन लोगों की निजी और डिजिटल जानकारी ‘एक्स’ से माँगी है।