‘ब्राह्मण हूँ, इसलिए निशाना बनाया’: बिहार में वरिष्ठ अधिकारी ने कर्मचारी से करवाई घास की सफाई, जानिए क्या है पूरा मामला

बिहार के जमुई सिंचाई प्रमंडल कार्यालय में परिसर की घास की सफाई करते एक कार्यालय परिचर का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। कर्मचारी गजेंद्र कुमार चौबे ने कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उससे उसके निर्धारित काम के अलावा अन्य कार्य कराए जा रहे हैं।

करीब दो मिनट के वायरल वीडियो में चौबे कार्यालय परिसर में घास साफ करते नजर आ रहे हैं। काम करते हुए वह अपना परिचय गजेंद्र कुमार चौबे के रूप में देते हैं और बताते हैं कि वह सिंचाई प्रमंडल कार्यालय में परिचर के पद पर तैनात हैं। वह कहते हैं कि ‘बॉस’ ने उन्हें पूरे परिसर की घास साफ करने के लिए कहा है।

‘मैं अपने बच्चों के लिए यह काम कर रहा हूँ’

वीडियो में एक अन्य व्यक्ति चौबे से पूछता है कि वह घास क्यों साफ कर रहे हैं, क्योंकि यह परिचर के नियमित कार्यों का हिस्सा नहीं है। इस पर चौबे जवाब देते हैं कि वह अपने बच्चों का पेट पालने के लिए यह काम कर रहे हैं और उन्हें नौकरी जाने का डर है।

वह आगे कहते हैं, “मैं अपने बच्चों के लिए यह काम कर रहा हूँ।” उनका दावा है कि निर्देशों का पालन करने से इनकार करने पर उनका वेतन रोकने या उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी गई थी।

चौबे वीडियो में यह भी आरोप लगाते हैं कि उनके साथ इसलिए भेदभाव किया जा रहा है क्योंकि वह ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। उनके अनुसार, कार्यालय में वर्तमान में सात परिचर काम कर रहे हैं, लेकिन इस तरह का काम केवल उनसे कराया जा रहा है।

उन्होंने एक अन्य परिचर दिनेश कुमार का भी नाम लिया और आरोप लगाया कि वह केवल अपनी हाजिरी लगाते हैं और कार्यालय से चले जाते हैं। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति चौबे से कहता है कि यह वीडियो उनकी अनुमति पर बनाया जा रहा है और इसे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा, ताकि मामले की जाँच हो सके।

कार्यपालक अभियंता ने आरोपों को खारिज किया

इस बीच, कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार ने चौबे के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप गलत हैं। कुमार ने बताया कि वह करीब डेढ़ साल से जमुई में तैनात हैं। परिचरों को सौंपे जाने वाले काम के बारे में उन्होंने कहा कि वे सिंचाई और राजस्व वसूली से संबंधित कार्यों में भी शामिल रहते हैं।

कुमार के आगे कहा, “चपरासियों के 32 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल सात परिचर काम कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि अधिकांश परिचरों को वसूली से संबंधित कार्यों के लिए बाहर भेजा जाता है, जबकि चौबे की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें कार्यालय में रखा गया है। कुमार के मुताबिक, फिलहाल कार्यालय में फाइलों से संबंधित ऐसा कोई बड़ा काम उपलब्ध नहीं है, जिसे चौबे को सौंपा जा सके।

इंजीनियर का आरोप- कर्मचारी को बहकाकर बनवाया गया वीडियो

कार्यपालक अभियंता ने यह भी आरोप लगाया कि चौबे को बहकाकर वीडियो बनवाया गया। उनका दावा है कि मंडलीय लेखा अधिकारी करुणानिधि सौरभ ने चौबे को प्रभावित किया और वीडियो रिकॉर्ड करवाने की व्यवस्था की। कुमार ने आगे आरोप लगाया कि पिछले दो महीनों से ऐसी स्थिति पैदा करने के प्रयास किए जा रहे थे, जिससे चौबे को पटना में रहने की अनुमति मिल सके।

उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि वीडियो रिकॉर्ड किए जाने से पहले चौबे को शराब पिलाई गई थी। कुमार ने जातिगत भेदभाव के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सरकारी सेवा में इस तरह के व्यवहार की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, “लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति हर बात में जाति को लाकर सरकारी नौकरी नहीं चला सकता। हमारे खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं।”

FIR की धमकी के बाद साइबर थाने में शिकायत

इस बीच, चौबे ने कहा कि उन्हें पता नहीं था कि जब वह घास साफ कर रहे थे, तब उनका वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद कार्यपालक अभियंता ने कथित तौर पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने की बात कही। इसके बाद चौबे ने साइबर थाने का रुख किया और शिकायत दर्ज कराई।

घटना के बाद कर्मचारी और विभाग की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे हैं। जहां चौबे ने भेदभाव और अपने निर्धारित कर्तव्यों से बाहर का काम करने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है, वहीं कार्यपालक अभियंता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि कर्मचारी को दूसरों ने बहकाकर वीडियो बनवाया।