राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में, मध्य प्रदेश का इंदौर रविवार (5 अक्टूबर 2025) को एक भव्य और ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। ‘संघे शक्ति कलियुगे’ मंत्र के साथ शुरू हुई संघ की यात्रा के 100 साल पूरे होने की कड़ी में, इंदौर संभाग के चार जिलों के 34 नगरों में एक साथ पथ संचलन निकाला गया।
मुख्य आकर्षण और भागीदारी
जानकारी के अनुसार, पथ संचलन में करीब डेढ़ लाख (1.5 लाख) स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में हिस्सा लिया। यह संचलन अलग-अलग मार्गों पर पूरे दिन चला। हर एक संचलन लगभग 30 से 45 मिनट तक चला, जिसमें घोष वादन दल भी शामिल था, जिसने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से भर दिया।
इस गौरवशाली आयोजन में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी जैसे सह सरकार्यवाह अरुण कुमार, मध्य क्षेत्र के कार्यवाह हेमंत मुक्तिबोध, प्रांत प्रचारक राजमोहन, और प्रांत संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री शामिल हुए। जो बुजुर्ग स्वयंसेवक संचलन में चल नहीं सकते थे, उनके लिए विशेष मंचों और घरों की छतों से पूर्ण गणवेश में भागीदारी की व्यवस्था की गई थी।
संघ का ‘राष्ट्र जागरण’ के लिए पाँच सूत्रीय संदेश
इस अवसर पर, संघ ने राष्ट्र जागरण और समाज निर्माण के लिए पाँच प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया, जिसे ‘सोपान’ बताया गया, जिसमें ट्रैफिक नियमों का पालन करना, स्वच्छता बनाए रखना, टैक्स चुकाना, समय का पालन करना और सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण करना आदि शामिल है। इसके अलावा, जात-पात से ऊपर उठकर समानता का व्यवहार करना और सभी महापुरुषों के चित्रों तथा पर्वों में भागीदारी सुनिश्चित करना भी बताया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल पौधा लगाना, जल पुनर्भरण करना, घरों के निर्माण में प्राकृतिक प्रकाश और हवा का ध्यान रखना बताया गया। वहीं, स्वदेशी जीवनशैली के लिए भारतीय वेशभूषा अपनाना, ताजा भारतीय भोजन करना और मातृभाषा में संवाद को प्राथमिकता बताया गया।
यह आयोजन न केवल संघ की संगठनात्मक शक्ति को दर्शाता है, बल्कि समाज में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और समरसता के भाव को मजबूत करने का भी एक प्रयास है।

