रायबरेली में हरिओम की हत्या में कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी ने ढूँढ ली जाति, जानें क्या है पूरा सच?

रायबरेली पुलिस ने शनिवार (4 अक्टूबर 2025) को एक युवक हरिओम की हत्या मामले में एक्स पर जानकारी साझा की थी। इस जानकारी में हत्या चोरी के शक में पिटाई के कारण हुई थी, जिसमें पाँच लोगों की गिरफ्तारी की भी बात बताई गई थी। इसके बावजूद, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने घटना को जातिगत हिंसा, नफरत और भीड़तंत्र से जोड़ते हुए यूपी सरकार पर हमला किया। साथ ही, सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाई। पुलिस के स्पष्ट तथ्यों के सामने भ्रामक जानकारी देने के कारण राहुल गाँधी अपनी फजीहत करवाते घुम रहे है।

पुलिस ने पहले ही बता दी थी सच्चाई

रायबरेली की थाना ऊँचाहार पुलिस ने युवक हरिओम वाल्मीकि की हत्या के तुरंत बाद कार्रवाई की और आधिकारिक ट्वीट जारी किया था। पुलिस ने स्पष्ट किया था कि युवक की हत्या ‘चोर समझकर की गई पिटाई’ के कारण हुई है। पुलिस ने हत्या करने वाले पाँच अभियुक्तों को तुरंत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस का ‘जातिगत’ हमला

पुलिस की जानकारी आने के बावजूद, राहुल गाँधी और कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने इस घटना को दलित अस्मिता पर हमला बताया। राहुल गाँधी ने इस हत्या को इंसानियत और संविधान की हत्या बताया। उन्होंने सीधे आरोप लगाया कि देश में दलितों, जनजातियों और गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उनकी आवाज कमजोर है।

राहुल गाँधी ने कहा कि नफरत और हिंसा को सत्ता का संरक्षण मिला हुआ है। वहीं, कॉन्ग्रेस ने यहाँ तक दावा किया कि मरने से पहले हरिओम के अंतिम शब्द ‘राहुल गाँधी जी, मेरी मदद करो’ थे, और हत्यारों ने ‘हम बाबा के आदमी हैं’ कहकर मजाक उड़ाया।

राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के बड़े राजनीतिक दावों के सामने पुलिस के तथ्य पूरी तरह से अलग थे। पुलिस ने हत्या का कारण चोरी के शक में हुई पिटाई बताया, जबकि राहुल गाँधी ने इसे जातिगत और राजनीतिक मुद्दा बनाया।

यह साबित हुआ कि राहुल गाँधी ने पुलिस की कार्रवाई और तथ्यों को नजरअंदाज किया। राहुल गाँधी ने केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए दलितों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए इस घटना को जानबूझकर ‘जातिगत हिंसा’ का रंग दिया, जिससे उनकी फजीहत हुई।