दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए डॉ उमर नबी के बारे में जाँच एजेंसियों ने उसकी अंतिम 10 दिनों की गतिविधियों का पूरा घटनाक्रम तैयार किया है। फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे उमर ने 31 अक्टूबर से 9 नवंबर तक नूँह के हिदायत कॉलोनी में एक किराए के कमरे में खुद को पूरी तरह बंद रखा। वह दिनभर बाहर नहीं निकलता था, न नहाता था, न कपड़े बदलता था और कमरे के अंदर ही शौच कर देता था। रात में वह कभी-कभार खाना खाने बाहर निकलता था।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह कमरा अफसाना नाम की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के घर में था। अफसाना के जीजा शोएब, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी में ही इलेक्ट्रिशियन है, उमर को 31 अक्टूबर को i20 कार में लेकर आया था। शुरू में अफसाना ने उमर को चाय-नाश्ता भी दिया, लेकिन उसकी संदिग्ध हरकतें देखकर परिवार ने दूरी बना ली।
अफसाना की नाबालिग बेटी के अनुसार, उमर 10 दिनों तक एक ही कपड़े पहने रहा और केवल रात में ही बाहर निकलता था। उसके पास दो मोबाइल थे, लेकिन उसने अपने सिम का इस्तेमाल नहीं किया और अफसाना के फोन का हॉटस्पॉट लेकर इंटरनेट कॉल करता था।
कमरे के अंदर फैली गंदगी के कारण जब शौच बाहर बहने लगा तो अफसाना की बेटी ने शिकायत की। यह जानकारी मिलने पर शोएब ने अफसाना से बात की, जिसके बाद 9 नवंबर की रात करीब 11 बजे उमर अचानक कमरे से निकल गया। 10 नवंबर को उसने अपनी कार समेत दिल्ली में खुद को उड़ा लिया।
जाँच में पता चला कि इस आतंकी मॉड्यूल के कई सदस्य पकड़े जाने से उमर घबरा गया था। पुलिस ने उसके साथियों के ठिकानों से 3,000 किलो अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर और हथियार बरामद किए थे। दबाव बढ़ने पर उमर नूंह में छिपा रहा और संभवत: सबूत नष्ट या छिपाने के लिए कार में विस्फोटक लेकर दिल्ली पहुँचा।
CCTV फुटेज में भी उसकी मूवमेंट दर्ज हुई है। 9 नवंबर रात 01:01 बजे वह फिरोजपुर झिरका के एक ATM में पैसा निकालने गया। कुछ देर बाद फिर वहाँ लौटा और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से होते हुए राजधानी की ओर निकल गया। अगले दिन शाम को उसने कार में धमाका किया।
फिलहाल NIA अफसाना, शोएब और परिवार के कुछ सदस्यों से पूछताछ कर रही है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि उमर गिरफ्तारी के भय और बढ़ते दबाव के बीच बेहद मानसिक तनाव में था और इसी घबराहट में उसने आत्मघाती कदम उठाया।

