दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के भारती कॉलेज के 2 एसोसिएट प्रोफेसरों समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। इन दोनों प्रोफेसरों पर आरोप है कि इन्होंने एक महिला को फर्जी दस्तावेज के आधार पर कॉलेज में नौकरी दिलवाई थी।
पुलिस अब इस मामले की गहराई से जाँच करेगी। यह मामला एक 28 साल की महिला से जुड़ा है। वह भारती कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम कर चुकी है।
महिला का आरोप है कि DU के 2 प्रोफेसरों ने उससे संपर्क किया था। उन्होंने रिसर्च पेपर छपवाने के बहाने महिला से 1 लाख रुपए वसूले। प्रोफेसरों ने महिला को भरोसा दिलाया था कि यूनिवर्सिटी में नौकरी पाने के लिए ये पेपर बहुत जरूरी हैं।
कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?
पैसे लेने के बाद महिला को 23 नवंबर 2023 को असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नौकरी मिल गई। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 8 अगस्त 2024 को कॉलेज की प्रिंसिपल ने उसे एक चौंकाने वाली बात बताई। एक RTI जाँच में सामने आया कि महिला ने नौकरी के वक्त जो रिसर्च पेपर जमा किए थे, वे पूरी तरह फर्जी थे। इसके तुरंत बाद महिला को नौकरी से निकाल दिया गया।
कोर्ट ने आदेश में क्या कहा?
धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़ित महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने माना कि यह मामला गंभीर है और इसकी पूरी जाँच होनी चाहिए। जज ने पुलिस को आदेश दिया कि वे यह भी पता लगाएँ कि क्या इन प्रोफेसरों ने किसी और को भी इसी तरह अपने जाल में फँसाया है। हालाँकि, कोर्ट ने साफ किया कि अभी सिर्फ जाँच के आदेश दिए गए हैं, आरोपितों का गुनाह साबित होना बाकी है।

