दिल्ली हाई कोर्ट (HC) ने पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर मंडी और डेयरी फार्म क्षेत्र में अवैध कब्जों को लेकर अहम आदेश पारित किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की सरकारी जमीन पर बनी अवैध झुग्गी-झोपड़ियों और अनाधिकृत निर्माणों को 12 हफ्तों यानी तीन महीनों के भीतर हटाया जाए।
यह आदेश सोमवार (19 जनवरी 2026) को जस्टिस अमिल बंसल की बेंच ने मनोज भाटी और धर्मेंद्र दास द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने माना कि गाजीपुर मंडी और डेयरी फार्म क्षेत्र के बी, सी और डी ब्लॉक के आसपास करीब 30 हजार वर्ग मीटर (लगभग 36,000 गज) सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे हैं।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस पूरे क्षेत्र को अधिकतम 12 हफ्ते के भीतर कब्जा मुक्त किया जाए। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि कई विभागों की भागीदारी होने के कारण कार्रवाई में कुछ समय लग सकता है, लेकिन तय समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की स्पेशन टास्क फोर्स संयुक्त रूप से काम करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार होनी चाहिए और किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पहले जहाँ लगभग 500 झुग्गियाँ थी, वहाँ अब इनकी संख्या बढ़कर 5,500 तक पहुँच गई है। इस मामले में DUSIB, MCD और PWD के वकीलों ने SDM विनोद कुमार के पुराने आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई का समर्थन किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अवैध कब्जे को गलत मानते हुए सख्त रुख अपनाया और इसे जल्द हटाने की कार्रवाई शुरू करने के आदेश पारित किए।
अवैध कब्जा कर मस्जिद-मदरसों का निर्माण, उपराज्यपाल को शिकायत
यह मामला तब सामने आया, जब स्थानीय नागरिकों ने दिल्ली के उपराज्यपाल के आधिकारिक ऐप पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गाजीपुर मंडी और डेयरी फार्म क्षेत्र की बी,सी और डी ब्लॉक में DUSIB की करीब 30,000 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर सुनियोजित तरीके से कब्जा किया गया है।
शिकायत के अनुसार, पहले जहाँ लगभग 500 झुग्गियाँ थी, वहाँ यह संख्या धीरे-धीरे बढ़कर 5500 के पार पहुँच रही है। बी-ब्लॉक, गली नंबर 6 में पावर हाउस के पीछे करीब 15 हजार मीटर जमीन पर अवैध डेयरियों के संचालन, श्मशान घाट के पास लगभग 25 बीघा जमीन पर 100 से 150 झुग्गियों के बस जाने और 10/10 के अस्थायी ढाँचों के सैकड़ों गज में फैलने के आरोप लगाए गए।
इन कब्जों से हर महीने लाखों रुपए की अवैध वसूली की बात भी शिकायत में कही गई। शिकायत में PFI जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) के सक्रिय रहने की आशंका भी जताई गई। आरोप है कि मजहबी पहचान की आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जा कर अस्थायी ढाँचों को अवैध मस्जिद और मदरसों में बदला गया।
इसके अलावा गाजीपुर मंडी और आनंद विहार क्षेत्र में नकली आधार, पैन और वोटर ID के जरिए अवैध प्रवासियों को बसाया जा रहा है, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया। इन शिकायतों के हवालों से ही यह मामला कोर्ट तक पहुँचा, जिसके बाद अब दिल्ली हाई कोईट के आदेश से कार्रवाई का रास्ता खुला है।

