ईरान युद्ध और होर्मुज बंद होने पर भी मोदी सरकार ने सुनिश्चित की भारतीय जहाजों की आवाजाही: पढ़ें- प्रधानमंत्री ने लोकसभा में क्या बताया

दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव और स्टेट ऑफ हार्मुज में आ रही रुकावटों के बीच भारत सरकार सतर्क हो गई है। यह समुद्री रास्ता भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि यहीं से देश का बड़ा हिस्से में कच्चा तेल, गैस और खाद आता है। ऐसे में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमले और समुद्री रास्तों में रुकावट ‘अस्वीकार्य’ है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार कूटनीतिक स्तर पर काम कर रही है ताकि भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से गुजर सकें। भारत ने अलग-अलग देशों के सप्लायर्स साथ भी बातचीत जारी रखी है, जिससे इस तनावपूर्ण माहौल में भी व्यापार प्रभावित न हो।

सरकार ने केवल कूटनीति ही नहीं, बल्कि कई मंत्रालयों के साथ मिलकर एक संयुक्त योजना भी बनाई है। पेट्रोलियम, शिपिंग, खाद, बिजली और व्यापार जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ बैठकें की गई हैं। इसमें ईंधन की उपलब्धता, सप्लाई चेन और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से समीक्षा की गई। साथ ही, यह भी तय किया गया कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो किन विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा, सरकार अब एक ही रास्ते पर निर्भर रहने की बजाए दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे रही है। नए सप्लायर और वैकल्पिक रास्तों की तलाश की जा रही है। घरेलू स्तर पर भी LPG की उपलब्धता बढ़ाने और उत्पादन बढ़ाने के कदम उठाए गए हैं, क्योंकि भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत LPG जरूरत आयात करता है।

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि आम लोगों पर इस संकट का असर कम से कम पड़े। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की सप्लाई को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।