ईरान के साथ जारी जंग के बीच दुनिया को मजबूत नेतृत्व दिखाने की कोशिश कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अपने ही देश में राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में नजर आ रहे हैं। जिस ‘रिजीम चेंज’ की बात ट्रंप ईरान के संदर्भ में कर रहे थे, अब वैसा ही माहौल उनके खिलाफ अमेरिका के भीतर बनता दिख रहा है।
गिरती लोकप्रियता, बढ़ती महँगाई, ईंधन की कीमतों में उछाल और विवादों से घिरी सरकार, इन सबने व्हाइट हाउस के अंदर हलचल तेज कर दी है। हालात ऐसे हैं कि अब ट्रंप अपनी ही टीम में बड़े बदलाव पर विचार कर रहे हैं। व्हाइट हाउस के अंदर उथल-पुथल की शुरुआत अटॉर्नी जनरल पॉम बॉन्डी को हटाए जाने से हुई।
इसके अलावा होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम को भी हाल के हफ्तों में पद से हटाया जा चुका है। इन फैसलों के बाद यह साफ संकेत मिल रहा है कि ट्रंप अपनी टीम में बदलाव के मूड में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप इस बार अपने पहले कार्यकाल जैसी बड़ी और लगातार फेरबदल वाली रणनीति से बचना चाहते हैं।
उनके करीबी अधिकारियों का कहना है कि इस बार ‘बड़े बदलाव’ की बजाय ‘टार्गेटेड चर्न’ यानी सीमित लेकिन प्रभावी बदलाव किए जा सकते हैं जिससे एक तरफ सरकार एक्टिव दिखे और दूसरी तरफ अस्थिरता का संदेश न जाए।
ईरान युद्ध बना घरेलू राजनीतिक संकट
28 फरवरी से शुरू हुई ईरान के साथ जंग अब करीब पाँच हफ्ते पुरानी हो चुकी है और इसका असर सीधे अमेरिकी जनता पर दिखने लगा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है, जिससे महँगाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है।
ताजा सर्वे के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 36% तक पहुँच गई है, जो उनके मौजूदा कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। इतना ही नहीं, करीब 60% अमेरिकी इस जंग के खिलाफ हैं और मानते हैं कि यह लड़ाई लंबी खिंच सकती है, जिससे आर्थिक बोझ आम जनता को उठाना पड़ेगा। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने साफ कहा, “लोग विचारधारा को कुछ हद तक सहन कर लेते हैं लेकिन पेट्रोल के दाम तुरंत असर दिखाते हैं।”
राष्ट्र को संबोधन भी रहा फीका, नहीं मिला राजनीतिक ‘रीसेट’
ट्रंप ने 1 अप्रैल 2026 को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया, जिसका मकसद था लोगों को भरोसा दिलाना कि हालात नियंत्रण में हैं। लेकिन यह भाषण वह असर नहीं छोड़ पाया जिसकी उम्मीद की जा रही थी। ट्रंप ने अपने संबोधन में जंग खत्म करने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं बताया, जिससे लोगों में यह धारणा बनी कि यह संघर्ष लंबा चल सकता है।
व्हाइट हाउस के भीतर चल रही चर्चाओं की एक बड़ी वजह आगामी मिडटर्म चुनाव भी हैं। रिपब्लिकन पार्टी के लिए सत्ता बनाए रखना चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में कैबिनेट में बदलाव को ‘रीसेट बटन’ के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि जनता को यह संदेश दिया जा सके कि सरकार हालात को संभालने के लिए सक्रिय है।
इस बीच ट्रंप मीडिया कवरेज से भी नाराज बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि ईरान युद्ध को लेकर उन्हें गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने अपनी टीम से सकारात्मक खबरें बढ़ाने को कहा है। हालाँकि उन्होंने अपनी रणनीति या बयानबाजी में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं दिया है। यानी एक तरफ वे अपनी छवि को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हालात उनके खिलाफ जाते दिख रहे हैं।

