वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी हमले के बाद गिरफ्तारी को लेकर वैश्विक राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। इसे अमेरिका के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है लेकिन मशहूर जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर इस कदम से मिलने वाले लंबे समय के फायदों को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
‘इंडिया टुडे’ से बातचीत में ब्रेमर ने कहा कि व्हाइट हाउस को भले ही इस समय राजनीतिक लाभ मिलता दिख रहा हो लेकिन यह स्थिति स्थाई नहीं भी रह सकती। उनके अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता से हटने के बाद अमेरिका की नीति पूरी तरह बदल सकती है।
ब्रेमर ने कहा कि अगला अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लिए गए कई फैसलों को पलट सकता है। उन्होंने अमेरिका की स्थिति की तुलना चीन, रूस और भारत से करते हुए कहा कि यह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग या भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा मामला नहीं है जिन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में रहते हुए लंबे समय तक सत्ता संभाली है और जिनकी लोकप्रियता मजबूत बनी हुई है। ब्रेमर ने कहा, “ये ट्रंप हैं, जो काफी अलोकप्रिय हैं, 80 साल के हैं और 3 साल में सत्ता से बाहर हो जाएँगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में हर 4 साल में सत्ता बदलने की संभावना रहती है जिससे नीतियों में निरंतरता नहीं बन पाती। वहीं, इसके उलट चीन, रूस और भारत जैसे देशों में नेतृत्व लंबे समय तक बना रहता है और इससे रणनीतिक फैसलों का असर धीरे-धीरे लेकिन स्थिर रूप से दिखाई देता है।
ब्रेमर का मानना है कि जिस तरह ट्रंप ने अपने पहले के राष्ट्रपति की कई नीतियों को खत्म किया था तो उसी तरह उनका उत्तराधिकारी भी ट्रंप के फैसलों को बदल सकता है। ऐसे में मादुरो की गिरफ्तारी को अमेरिका की स्थाई रणनीतिक जीत मानना अभी जल्दबाजी होगी।

