मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर लागू हो गया है। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिज्बुल्लाह को चेतावनी देते हुए कहा, “मुझे उम्मीद है कि हिज्बुल्लाह इस महत्वपूर्ण समय में अच्छे तरीके से व्यवहार करेगा। अगर वह ऐसा करता है, तो यह उसके लिए एक बड़ा अवसर होगा। अब और हत्याएँ नहीं होनी चाहिए, आखिरकार शांति स्थापित होनी चाहिए।”

यह संघर्षविराम अमेरिका की अगुवाई में हुई बातचीत के बाद लागू हुआ है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन (Joseph Aoun) से बातचीत की, जिसे उन्होंने बेहतरीन बताया। इसी बातचीत के बाद दोनों देशों ने कुछ समय के लिए लड़ाई रोकने पर सहमति जताई।
ट्रंप बोले- हिज्बुल्लाह भी समझौते में शामिल
ट्रंप ने कहा, “यह बहुत रोमांचक है। लेबनान के साथ यह बहुत रोमांचक है। मुझे लगता है कि हम एक समझौते पर पहुँचेंगे। हम 44 वर्षों में पहली बार बैठक करने जा रहे हैं और लेबनान इजरायल से मिलेगा और वे संभवतः व्हाइट हाउस में मिलेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “वे युद्धविराम करने जा रहे हैं और इसमें हिज्बुल्लाह भी शामिल होगा।” ट्रंप ने संकेत दिया कि अगले एक-दो हफ्तों में बातचीत काफी तेज हो सकती है और उन्हें उम्मीद है कि लेबनान खुद हिजबुल्लाह के मामले को सुलझा लेगा।
नेतन्याहू ने कहा- हमारी सेना पीछे नहीं हटेगी
सीजफायर लागू होने के बावजूद हालात पूरी तरह शांत नहीं हैं। ट्रंप के इस बयान के बावजूद इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर के सिक्योरिटी जोन में बनी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वहाँ से नहीं जा रहे हैं ताकि घुसपैठ और मिसाइल हमलों को रोका जा सके
नेतन्याहू ने कहा, “हम 10 किलोमीटर के सुरक्षा क्षेत्र में बने रहेंगे, जिससे हमें समुदायों में घुसपैठ और टैंक-रोधी मिसाइलों के हमले को रोकने में मदद मिलेगी। हम यहीं रहेंगे। हम यहाँ से नहीं हटेंगे।” उनका कहना है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से जरूरी है और इजरायल का लक्ष्य हिज्बुल्लाह को निरस्त्र (निहत्था) करना है।

