चुनाव आयोग ने सोमवार (23 मार्च 2026) को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पहली सप्लीमेंट्री (पूरक) वोटर लिस्ट जारी कर दी। यह कदम राज्य में ‘संदिग्ध मतदाताओं’ (डाउटफुल वोटर्स) से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे के बीच उठाया गया है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से कुल 58,20,899 नाम हटा दिए थे। इन नामों को मृत्यु, अनुपस्थिति, स्थान परिवर्तन और डुप्लीकेट एंट्री जैसे कारणों से हटाया गया था।
इसी दौरान करीब 60 लाख ‘संदिग्ध मतदाताओं’ की सूची भी तैयार की गई जिनकी जाँच न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जानी थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, चुनाव आयोग को मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करना अनिवार्य है। पहली सप्लीमेंट्री सूची में उन करीब 29 लाख मामलों को शामिल किया गया है, जो पहले जाँच के अधीन थे।
यह कई सप्लीमेंट्री सूचियों में से पहली है। चुनाव आयोग दूसरी सूची 27 मार्च को और तीसरी सूची 3 अप्रैल को जारी करेगा। यह भी उल्लेखनीय है कि 705 न्यायिक अधिकारियों की एक टीम इन संदिग्ध नामों की जाँच में जुटी हुई है। सोमवार को हटाए गए नामों को लेकर सस्पेंस बना रहा क्योंकि चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए या जोड़े गए हैं।
हालाँकि, मतदाता अपनी बूथ संख्या और विधानसभा क्षेत्र की जानकारी देकर ECI की वेबसाइट पर यह जाँच सकते हैं कि उनका नाम सप्लीमेंट्री सूची में है या नहीं। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल ने यह बताने से इनकार कर दिया कि जाँच प्रक्रिया में कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को सप्लीमेंट्री सूची से आपत्ति है तो वे कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा स्थापित अपीलीय ट्रिब्यूनल में चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दे सकते हैं। गौरतलब है कि संदिग्ध मतदाताओं के सबसे ज्यादा मामले मुर्शिदाबाद (11 लाख), मालदा (8.28 लाख), दक्षिण 24 परगना (5.22 लाख) और उत्तर 24 परगना (5 लाख) में सामने आए।
सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट का उद्देश्य ऐसे वैध मतदाताओं को दोबारा शामिल करना है जिनके दस्तावेजों की गहन जाँच जरूरी थी ताकि 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले मतदाता सूची को सही बनाया जा सके।

