यूरोप में भीषण गर्मी ला रही गरीबी, 2100 तक 12.7 करोड़ लोग हो सकते हैं गरीब: फ्रांस-स्पेन में रिकॉर्ड तापमान, विशेषज्ञ बोले- गर्मी-सूखा दे रहे अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका

यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन और जर्मनी समेत कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुँच गया है। इस बीच एक नई स्टडी ने चेतावनी दी है कि हीटवेव और सूखे का संयुक्त प्रभाव केवल लोगों के स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि उनकी आय, रोजगार और जीवन-स्तर पर भी गंभीर असर डाल रहा है।

क्लाइमेट एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में ऐसे चरम मौसमीय घटनाक्रम औसतन घरेलू आय में लगभग 3 प्रतिशत तक की गिरावट ला रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले दशकों में करोड़ों लोग गरीबी के खतरे में आ सकते हैं।

यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, कई देशों में आपात स्थिति

यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुँच गया है। फ्रांस में 1947 के बाद का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जबकि देश के आधे से अधिक हिस्से को रेड हीट अलर्ट के तहत रखा गया। स्पेन ने 1950 के बाद का सबसे अधिक दैनिक औसत तापमान दर्ज किया और ब्रिटेन में भी जून महीने की रिकॉर्ड गर्मी देखने को मिल रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस ऐतिहासिक हीटवेव के पीछे ओमेगा ब्लॉक नामक मौसमीय प्रणाली है, जो एक विशाल और स्थिर हीट डोम बनाकर गर्म हवा को लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में फंसा देती है। इसके कारण तापमान लगातार ऊँचा बना रहता है और राहत मिलने की संभावना कम हो जाती है।

हीटवेव और सूखे से घट रही लोगों की आय

क्लाइमेट एनालिटिक्स की नई स्टडी में 2004 से 2022 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के अनुसार अकेली हीटवेव से औसतन घरेलू आय में 0.7 प्रतिशत और अकेले सूखे से 1.8 प्रतिशत की गिरावट आती है, लेकिन जब दोनों घटनाएँ एक साथ होती हैं तो आय में औसतन लगभग 3 प्रतिशत की कमी दर्ज की जाती है।

स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता जेसी श्लेपन ने कहा कि मौजूदा हीटवेव पहले ही लोगों के स्वास्थ्य, रोजगार और काम करने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। अत्यधिक गर्मी और सूखे के कारण श्रमिकों की उत्पादकता घटती है, कृषि उत्पादन प्रभावित होता है और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ जाता है। ऊर्जा उत्पादन तथा परिवहन जैसी आवश्यक सेवाएँ भी इससे प्रभावित होती हैं।

बढ़ेगा गरीबी का खतरा, गरीब परिवारों पर सबसे ज्यादा असर

रिपोर्ट के अनुसार हीटवेव और सूखे का सबसे अधिक प्रभाव गरीब परिवारों पर पड़ता है। यूरोप के सबसे गरीब 20 प्रतिशत परिवारों की आय में औसतन 4 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई, जबकि बाकी आबादी में यह कमी 1.1 से 1.8 प्रतिशत के बीच रही।

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि मौजूदा नीतियों के अनुसार 2100 तक वैश्विक तापमान 2.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो औसत यूरोपीय परिवार की आय 27 प्रतिशत तक घट सकती है।

वहीं यदि दुनिया पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को हासिल कर लेती है तो यह नुकसान घटकर 7 प्रतिशत तक सीमित रह सकता है। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2.7 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की स्थिति में यूरोप में गरीबी के खतरे का सामना करने वाले लोगों की संख्या 12.7 करोड़ तक पहुँच सकती है, जबकि 1.5 डिग्री सेल्सियस वाले परिदृश्य में यह संख्या करीब 6 करोड़ रहेगी। ग्रीस, स्पेन, रोमानिया, बुल्गारिया और साइप्रस उन देशों में शामिल हैं, जिन पर इसका सबसे गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।