31 दिसंबर को 4.5 लाख गिग वर्करों ने किया काम, Zomato-Blinkit से डिलीवर हुए 75 लाख ऑर्डर: CEO दीपिंदर गोयल ने दी जानकारी, ध्रुव राठी की अपील हुई फुस्स

देशभर में बुधवार (31 दिसंबर 2025) को गिग वर्कर्स की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर दिनभर चर्चा बनी रही। सोशल मीडिया पर कई प्रभावशाली यूट्यूबर्स और संगठनों ने दावा किया कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और अन्य क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जुड़े लाखों डिलीवरी पार्टनर्स काम बंद रखेंगे, जिससे न्यू ईयर ईव पर आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। इसी क्रम में यूट्यूबर ध्रुव राठी ने वीडियो जारी कर लोगों से इन ऐप्स का उपयोग न करने और गिग वर्कर्स से एक दिन की कमाई छोड़ने की अपील की। हालाँकि, जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आई।

न्यू ईयर ईव के मौके पर फूड और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म जोमैटो और ब्लिंकिट पर ऑर्डर्स में बढ़ोतरी देखने को मिली। कंपनी के संस्थापक और CEO दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि हड़ताल का उनके यह पर कोई असर नहीं हुआ। उनके अनुसार, जोमैटो और ब्लिंकिट ने मिलकर उस दिन 75 लाख से अधिक ऑर्डर डिलीवर किए और 63 लाख से ज्यादा ग्राहकों तक सेवाएँ पहुँचाईं। इस दौरान 4.5 लाख से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स काम कर रहे थे।

गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दिन डिलीवरी पार्टनर्स को कोई अतिरिक्त इंसेंटिव नहीं दिया गया, बल्कि न्यू ईयर ईव पर आमतौर पर दिए जाने वाले प्रोत्साहन ही लागू थे। इससे यह संकेत मिला कि डिलीवरी पार्टनर्स ने अपनी मर्जी से काम करना चुना।

दीपिंदर गोयल ने क्या कहा

दीपिंदर गोयल ने स्थानीय प्रशासन, ग्राउंड टीमों और खासतौर पर डिलीवरी पार्टनर्स का आभार जताया। उन्होंने कहा कि धमकी और दबाव के बावजूद डिलीवरी पार्टनर्स ने ईमानदारी से काम करना चुना।

गिग इकॉनमी पर चल रही बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोयल ने कहा कि यदि कोई व्यवस्था मूल रूप से शोषणकारी होती, तो वह इतने बड़े पैमाने पर लोगों को अपनी ओर आकर्षित नही रख पाती। उन्होंने लोगों से स्वार्थी हितों से प्रेरित नैरेटिव्स से सतर्क रहने की अपील की।

गोयल ने गिग इकॉनमी को भारत की सबसे बड़ी संगठित रोजगार सृजन प्रणालियों में से एक बताया और कहा कि आने वाले सालों में इसका सामाजिक प्रभाव और साफ होगा। न्यू ईयर ईव की डिलीवरी और काम पर मौजूद डिलीवरी पार्टनर्स की संख्या ने यह भी दिखा दिया कि सोशल मीडिया पर हड़ताल को लेकर किए गए दावे और अपील का कोई फायदा नहीं हुआ।