सरकार ने देश में परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लोकसभा में ‘शांति’ (SHANTI) बिल पास कर दिया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि पुराने सख्त कानूनों की वजह से कंपनियों में डर बैठ गया था और पिछले 10 साल से सहयोग ठप था। नए बिल से निजी कंपनियों को मौका मिलेगा, मुआवजे की पुख्ता व्यवस्था होगी और सुरक्षा नियम पहले जैसे ही सख्त रहेंगे। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा पैदा करना है।
क्यों लाया गया ‘शांति’ बिल
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि परमाणु उपकरण सप्लायरों पर जिम्मेदारी को लेकर कानून बहुत सख्त था। इसी वजह से कोई भी कंपनी आगे नहीं आ रही थी। इसे उन्होंने ‘साइलेंट फोबिया’ कहा। नए बिल से यह डर खत्म करने की कोशिश की गई है।
सरकार ने साफ किया कि परमाणु हादसे की सीधी जिम्मेदारी ऑपरेटर की होगी। सप्लायर से निपटना ऑपरेटर का काम रहेगा। ऑपरेटर की जिम्मेदारी को रिएक्टर के आकार के हिसाब से तय किया गया है, ताकि नई तकनीक जैसे छोटे रिएक्टर आ सकें।
सरकार ने यह भी कहा कि पीड़ितों को पूरा मुआवजा मिलेगा। इसके लिए तीन स्तर होंगे- ऑपरेटर की जिम्मेदारी, सरकार की मदद से बना न्यूक्लियर लायबिलिटी फंड और अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत अतिरिक्त मदद।
विपक्ष की आपत्ति पर सरकार का जवाब
कॉन्ग्रेस ने बिल का विरोध किया। उनका कहना है कि सप्लायर को जिम्मेदारी से बाहर करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बिल को संसदीय समिति में भेजने की माँग भी की। वहीं, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कोई नया कानून नहीं, बल्कि पुराने कानूनों में बदलाव है। सुरक्षा, परमाणु सामग्री पर नियंत्रण और जाँच पूरी तरह सरकार के हाथ में ही रहेंगे।
आगे की योजना
सरकार 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य रखती है और चाहती है कि कुल ऊर्जा में इसका हिस्सा 10 फीसदी हो। विवाद सुलझाने के लिए एक नया परमाणु ऊर्जा समाधान परिषद भी बनेगी।

