अयोध्या में राम मंदिर में धर्म ध्वज की स्थापना के बाद पाकिस्तान की ओर से आए बेतुके बयान पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने साफ कहा है कि पाकिस्तान को पहले अपने देश में अल्पसंख्यकों की बदहाल स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और दूसरों को उपदेश देना बंद करना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र की एक विशेषज्ञ समिति की उस रिपोर्ट को भी पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति पर सवाल उठाए गए थे।
भारत ने दिया दो-टूक जवाब
हालिया घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की टिप्पणी न सिर्फ आधारहीन है, बल्कि राजनीतिक साजिश का हिस्सा भी लगती है।
#Watch | Pakistan’s reported remarks have been noted and rejected with the contempt they deserve. A country with a deeply stained record of repression and systematic mistreatment of its minorities has no moral standing to lecture others. Instead of issuing hypocritical… pic.twitter.com/pW1QTQliFJ
— DD News (@DDNewslive) November 26, 2025
उन्होंने कहा, “हमने रिपोर्ट किए गऐ बयानों को देखा है और उन्हें उसी अवमानना साथ खारिज करते हैं जिसके वे हकदार हैं। एक ऐसे देश के तौर पर जिसका अपने अल्पसंख्यकों के दमन, कट्टरता और संस्थागत तौर पर बुरे बर्ताव का गहरा दागदार रिकॉर्ड है, पाकिस्तान के पास दूसरों को लेक्चर देने का कोई नैतिक आधार नहीं है। खोखले उपदेश देने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने अंदर झांके और अपने खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड पर ध्यान दे।”
पाकिस्तान का आरोप और भारत की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है और मुस्लिम संस्कृति पर हमले किए जा रहे हैं। साथ ही यह आरोप भी लगाया कि भारत की कई मस्जिदें उसी खतरे में हैं जिस तरह राम मंदिर मामले में हुआ था।
भारत ने इस बयान को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान झूठ फैलाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है, जबकि उसकी असल मंशा अपने देश में असंतोष, कट्टरता और बिगड़ती परिस्थितियों से ध्यान हटाना है।
रणनीति के पीछे फौज की भूमिका
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह बयानबाजी पाकिस्तान की उस नई रणनीति का हिस्सा है जिसमें भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ और पाकिस्तान को ‘मुस्लिम राष्ट्र’ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है। इस एजेंडा को सबसे पहले अप्रैल 2025 में पाकिस्तानी फौज प्रमुख जनरल असीम मुनीर के भाषण में देखा गया था, जिसमें उन्होंने हिंदुओं और मुस्लिमों को पूरी तरह अलग सभ्यताएँ बताया था।
कई विशेषज्ञों ने उस समय कहा था कि पाकिस्तानी फौज अपनी गिरती विश्वसनीयता को बचाने के लिए धार्मिक कार्ड खेल रही है और अब पाकिस्तान सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

