भारत और अमेरिका ने व्यापार को लेकर एक अंतरिम समझौते (Interim Agreement) के ढाँचे पर सहमति बना ली है। दोनों देशों ने इसे द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को घोषित इस ढाँचे के जरिए भारत और अमेरिका ने व्यापक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस BTA की औपचारिक शुरुआत 13 फरवरी 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
इस अंतरिम समझौते के तहत दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुँच को और बढ़ाने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत व भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया जाएगा।
भारत और अमेरिका के बीच यह अंतरिम समझौता दोनों देशों की साझेदारी में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह समझौता इस बात का संकेत है कि दोनों देश आपसी हितों के आधार पर संतुलित और पारस्परिक व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी मजबूती: PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को X पर एक पोस्ट में इसे भारत-अमेरिका के लिए बहुत अच्छी खबर बताया है। PM मोदी ने कहा, “दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के लिए एक ढाँचा तय हुआ है। मैं राष्ट्रपति ट्रंप को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने में व्यक्तिगत रुचि दिखाई।”
उन्होंने लिखा, “यह ढाँचा हमारे साझेदारी संबंधों में बढ़ती गहराई, भरोसे और ऊर्जा को दिखाता है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूती मिलेगी और भारत के मेहनती किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप इनोवेटर्स, मछुआरों और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खुलेंगे। इससे महिलाओं और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। भारत और अमेरिका दोनों नवाचार (Innovation) को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ढाँचा निवेश और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करेगा।”
$30 ट्रिलियन का खुला बाजार
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार के दरवाजे खुलेंगे। उन्होंने कहा, “इसका सबसे ज्यादा फायदा छोटे उद्योगों (MSMEs), किसानों और मछुआरों को होगा। निर्यात बढ़ने से महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।”
उन्होंने कहा, “इस समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क (टैरिफ) को घटाकर 18% कर देगा। इससे कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प उत्पाद और कुछ मशीनरी जैसे क्षेत्रों को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बाजार मिलेगा। इसके अलावा कई उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इनमें जेनेरिक दवाएँ, हीरे और आभूषण, तथा विमान के पुर्जे शामिल हैं। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को भी मजबूती मिलेगी।”
साथ ही, यह समझौता भारत की उस प्रतिबद्धता को भी दिखाता है कि वह किसानों के हितों और ग्रामीण आजीविका की रक्षा करेगा। इसलिए भारत ने संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। इनमें मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, मुर्गी पालन से जुड़े उत्पाद, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां, मांस आदि शामिल हैं।

