इंस्टाग्राम ने चलाए ‘Rape Video’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ से जुड़े विज्ञापन, ₹99 में यौन शोषण की सामग्री बेचने वाले Links को किया प्रमोट: रिपोर्ट

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक जाँच में इंस्टाग्राम के विज्ञापन सिस्टम को लेकर गंभीर खुलासा हुआ है। जाँच में सामने आया कि प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों का लिंक दिया जा रहा था, जहाँ 99 रुपए में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री खरीदी जा सकती थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद मेटा ने कई विज्ञापन हटाने, संबंधित अकाउंट बंद करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले लिंक ब्लॉक करने की बात कही है।

बीबीसी की जाँच में क्या मिला?

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने जाँच के लिए भारत में एक नया इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया। इस अकाउंट से बच्चों के यौन शोषण या अश्लील सामग्री से जुड़ा कोई कंटेंट सर्च नहीं किया गया। शुरुआत में केवल कुछ सामान्य और ग्लैमर से जुड़े अकाउंट फॉलो किए गए।

इसके बावजूद कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम की फीड में पहले महिलाओं को वीडियो कॉल की पेशकश करने वाले विज्ञापन और नग्न पुरुषों व महिलाओं को यौन संबंध बनाते हुए दिखाने वाले वयस्क अश्लील वीडियो वाले विज्ञापन दिखाई देने लगे। इसके बाद फीड में ऐसे विज्ञापन भी आने लगे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्द लिखे थे।

इन विज्ञापनों के साथ टेलीग्राम चैनलों के लिंक दिए गए थे, जहाँ 99 रुपए में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी। जाँच के दौरान बच्चों के यौन शोषण से जुड़े करीब 30 विज्ञापन और वयस्क अश्लील सामग्री से जुड़े लगभग 20 विज्ञापन सामने आए। एक विज्ञापन में एक लड़के और लड़की को दिखाया गया था।

इनकी उम्र करीब 12 साल की लग रही थी और वे यौन संबंध बना रहे थे। एक अन्य विज्ञापन में एक आदमी को एक बच्‍ची के कंधे पर बाँह डाले दिखाया गया। इसके साथ लिखा था कि वो 52 साल का है और लड़की 12 साल की। विज्ञापन पर लिखा था, ‘और देखने के लिए क्लिक करें’ और टेलीग्राम चैनल का लिंक था।

मेटा और टेलीग्राम ने क्या कहा?

बीबीसी ने ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की थी। शुरुआत में कंपनी ने जवाब दिया कि यह विज्ञापन उसकी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं करता। हालाँकि बाद में बीबीसी की जाँच सामने आने के बाद मेटा ने कहा कि उसने कई विज्ञापन हटा दिए हैं और संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया है।

मेटा के अनुसार, उसने ऐसे कई लिंक भी ब्लॉक किए हैं जो उसकी नीतियों का उल्लंघन कर रहे थे। मेटा ने कहा कि बच्चों का यौन शोषण बेहद गंभीर अपराध है और कंपनी इसे रोकने के लिए लगातार कार्रवाई करती है। कंपनी का कहना है कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह सही नहीं होता, लेकिन रिपोर्ट मिलने के बाद उस पर कार्रवाई की जाती है।

वहीं टेलीग्राम ने बताया कि उसने 2026 में बच्चों के यौन शोषण और हिंसक सामग्री से जुड़े 2.74 लाख से ज्यादा ग्रुप और चैनल हटाए हैं। कंपनी का कहना है कि वह ऐसी सामग्री हटाने के लिए तकनीक और मानव मॉडरेटर दोनों की मदद लेती है।

विज्ञापन सिस्टम पर क्यों उठे सवाल?

मेटा के मुताबिक इंस्टाग्राम पर कोई भी विज्ञापन दिखाने से पहले उसकी जाँच की जाती है। कंपनी का सिस्टम विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए फोटो, वीडियो, टेक्स्ट, ऑडियो और दिए गए लिंक की समीक्षा करता है। इसके बावजूद इस तरह के विज्ञापनों का प्लेटफॉर्म पर दिखाई देना उसके मॉडरेशन सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।

बीबीसी ने जब एक विज्ञापन की शिकायत की तो शुरुआत में उसे नियमों के खिलाफ नहीं माना गया। बाद में जाँच सामने आने के बाद कंपनी ने उसी तरह के कई विज्ञापनों और अकाउंट्स पर कार्रवाई की। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर ऐसे विज्ञापन शुरुआती जाँच में कैसे मंजूर हो गए।