ईरान में आर्थिक बदहाली के खिलाफ भड़के जनआंदोलन अब खूनी टकराव में बदलते दिख रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देशभर में जारी प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत के दावे सामने आए हैं, जबकि हजारों को गिरफ्तार किया गया है।
राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। महँगाई, बेरोजगारी और गिरती मुद्रा के खिलाफ उठी आवाजों को दबाने के लिए सरकार की सख्ती और अमेरिका के साथ बढ़ता टकराव इस संकट को और गहरा कर रहा है।
महँगाई और रियाल की गिरावट से भड़का जनाक्रोश
ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से दबाव में है। रियाल की कीमत में भारी गिरावट और रोजमर्रा की जरूरतों के दाम बढ़ने से आम लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब अन्य शहरों में फैल चुके हैं।
प्रदर्शनकारी खुलकर सरकार और सर्वोच्च नेता के खिलाफ नारे लगा रहें हैं और कई जगह सरकारी संपत्तियों को नुकसान भी पहुँचाया है। यह आंदोलन हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सरकार-विरोधी प्रदर्शन माना जा रहा है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई, गोलीबारी और मौतों के आरोप
प्रदर्शनों को काबू में करने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों ने आँसू गैस का इस्तेमाल करने के साथ-साथ फायरिंग भी कर रही है। मानवाधिकार समूहों का दावा है कि इस कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हजारों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी का कहना है कि अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है
वहीं कई अस्पतालों से गोली लगने से मौतों की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें 217 प्रदर्शनकारियों की मौत की बात कही गई है। दूसरी ओर सरकारी मीडिया प्रदर्शनकारियों को हिंसक और देशविरोधी बताकर लगातार कार्रवाई को समर्थन दे रही है।
खामेनेई का पलटवार, ट्रंप की खुली चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि विदेशी ताकतें देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही हैं और ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है। ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी है कि अगर ईरानी सरकार ने अपने ही नागरिकों पर हिंसा जारी रखी तो अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया देगा। दोनों नेताओं के बयानों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ गया है।
सरकार ने प्रदर्शनों के बीच देशभर में इंटरनेट और संचार सेवाओं पर रोक लगा दी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इससे हिंसा और मौतों की जानकारी बाहर आने से रोकी जा रही है। कनाडा सहित कई देशों ने ईरान में हो रही हिंसा की निंदा की है। भारत ने भी ईरान में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर निगरानी बढ़ाने की बात कही है।
ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुआ यह आंदोलन अब सत्ता और जनता के बीच सीधे टकराव में बदल चुका है, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

