कॉन्ग्रेस का दावा- डिस्पोजेबल कंटेनर्स को धोकर रेल में दोबारा दिया जा रहा खाना, IRCTC ने किया फेक्ट चैक: कहा- ‘कबाड़ में बेचने के लिए धोए जा रहे हैं’

कॉन्ग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर NDTV इंडिया का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें एक आदमी ट्रेन में एल्युमिनियम फॉयल वाले डिस्पोजेबल खाने के डिब्बे धोता और उन्हें फिर से इस्तेमाल के लिए जमा करता दिख रहा है। कॉन्ग्रेस के इन आरोपों पर भारतीय रेलवे कैटरिंग और टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने सख्त जवाब दिया है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने रेल मंत्री को टैग करते हुए एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें लिखा, “ये वीडियो अमृत भारत एक्सप्रेस (16601) का है। जहाँ गंदे डिस्पोजेबल फूड कंटेनर्स को धोकर दोबारा खाना देने के लिए रखा जा रहा है। जनता से टिकट पर फुल वसूली की जाती है लेकिन दूसरी ओर ये घटिया हरकत। शर्म आनी चाहिए।”

कॉन्ग्रेस के इन आरोपों पर IRCTC ने सफाई देते हुए कहा कि वीडियो के सामने आते ही जाँच कराई गई। जाँच के बाद IRCTC ने साफतौर पर इन आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि जिस वीडियो में एल्युमिनियम फॉयल वाले खाने के डिब्बे धोते हुए दिख रहे हैं, वो असल में सिंगल-यूज यानी एक बार इस्तेमाल होने वाले ट्रे हैं।

IRCTC के मुताबिक, जाँच में पता चला कि एक वेंडर (बिक्री करने वाला) बिना बिके खाने के पैकेट्स के डिब्बे धोकर उन्हें कबाड़ के तौर पर बेचने के लिए जमा कर रहा था। ये डिब्बे दोबारा खाना परोसने के लिए नहीं धोए जा रहे थे, जैसा कि कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया। IRCTC ने ये भी साफ किया कि ये काम रेलवे अधिकारियों की जानकारी के बिना किया गया।

IRCTC ने जोर देकर कहा कि खाने की सुरक्षा से जुड़ा कोई उल्लंघन नहीं हुआ है क्योंकि ट्रेन में जो भी खाना परोसा जाता है, वो अधिकृत किचन में ताजा और साफ-सफाई के सख्त नियमों के तहत तैयार होता है। साथ ही ट्रेन स्टाफ और कैटरिंग पार्टनर Express Food Services की तरफ से आधिकारिक चिट्ठियाँ भी दी गईं, जिनमें बताया गया कि ये घटना एकदम अलग-थलग थी और किसी वेंडर द्वारा बिना इजाजत के इस्तेमाल किए गए डिब्बों को संभालने से जुड़ी थी। ये कोई नियमित या सिस्टम की गलती नहीं थी।

ट्रेन संख्या 16601 के मैनेजर द्वारा हाथ से लिखे गए नोट में कहा गया, “दो वेंडर कैसरोल धो रहा था वह कैसरोल और गत्ता दोनों बेचने के लिए धो रहा था। हमने जबलपुर से पैक खाना लिया था। वह खाना फ्रेश रहता है। हमारी कंपनी से नया कैसरोल में खाना आता है। यूजर किया हुआ कैसरोल में खाना नहीं देता हूँ। इसमें कंपनी और मैनेजर की कोई गलती नहीं है।”

वहीं Express Food Services ने बताया, “उनके एक वेंडर ने बिना बिके खाने के पैकेट्स, खाली बोतलें और पैकिंग के डिब्बे इकट्ठा करके धोए थे ताकि उन्हें कबाड़ के रूप में बेचकर थोड़ा पैसा कमा सके।” उन्होंने आगे कहा कि वेंडर ने बताया है कि अलग-अलग स्टेशनों पर कबाड़ी आते रहते हैं और उसने ये फेंकी गई चीजें उन्हें देने के लिए जमा की थीं।

कंपनी ने साफ किया कि ये एक अलग-थलग घटना थी और यात्रियों को कभी भी इस्तेमाल किया हुआ या बचा हुआ खाना नहीं परोसा गया। उन्होंने कहा, “ट्रेन में जो भी खाना दिया जाता है, वो ताजा तैयार होता है और IRCTC के अधिकृत बेस किचन से आता है, जहाँ खाने की सुरक्षा और साफ-सफाई के तय मानकों का पूरा ध्यान रखा जाता है।”

उन्होंने अपील की, “हम विनम्र निवेदन करते हैं कि जो पोस्ट वायरल हो रही है, उसे झूठी और भ्रामक माना जाए क्योंकि वो Express Food Services की असली प्रक्रिया या नीति को नहीं दर्शाती।”

IRCTC ने इन दस्तावेजों को साझा करते हुए कहा कि “कैसेरोल (foil tray) सिर्फ एक बार इस्तेमाल की गई थी, उसे दोबारा खाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया।” उन्होंने कहा कि खाने परोसने के लिए कैसेरोल को दोबारा इस्तेमाल करने की अफवाहें न फैलाएँ।

उल्लेखनीय है कि ये डिस्पोजेबल खाने के डिब्बे एल्युमिनियम के बने होते हैं और कबाड़ में बेचने पर इनकी कीमत प्लास्टिक या कागज के मुकाबले ज्यादा मिलती है।