‘क्रांति नायकों को न्याय दो…’: जालियाँवाला बाग नरसंहार की बरसी पर चंबल में उठी वीर जीता से लेकर जंगली मंगली तक के स्मारक बनाने की माँग

यूपी के इटावा में ‘जीता चमार’ की होर्डिंग्स लग गई है। ये चर्चा का विषय है। होडिंग्स में पूछा जा रहा है कि ‘जीता चमार’ का सम्मान कब किया जाएगा। दरअसल देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास इन योद्धाओं के बगैर अधूरा है।

जालियांवाला बाग बरसी पर चंबल के क्रांतिवीरों को न्याय दिलाने की माँग की गई है। चंबल संग्रहालय पंचनद परिवार ने एक कार्यक्रम आयोजित कर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है। इसमें क्रांतिकारियों की स्मृतियों के संरक्षण और स्मारक निर्माण की माँग की गई है।

कार्यक्रम के दौरान कचहरी परिसर ‘क्रांति नायकों को न्याय दो’ और ‘स्मृतियों को जीवंत करो’ जैसे नारों से गूँज उठा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आजादी के 75 साल बाद भी चंबल घाटी के हजारों क्रांतिकारियों को इतिहास में सही जगह नहीं मिला। उन्होंने विशेष रूप से जीता चमार, मारून सिंह लोधी और जंगली-मंगली भंगी के नाम पर स्मारक बनाने की माँग की।

शहीद वंशज देवेंद्र सिंह चौहान एडवोकेट ने स्वतंत्र भारत की सरकारों पर चंबल के क्रांतिकारियों के इतिहास को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इटावा से कई बार मुख्यमंत्री बनने के बावजूद समाजवादी पार्टी ने दिवंगत मुखिया मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की। चंबल परिवार प्रमुख डॉ. शाह आलम राणा ने सैफई विश्वविद्यालय का नाम क्रांतिकारी जंगली-मंगली भंगी के नाम पर रखने की माँग भी की।

कार्यक्रम में घोषणा की गई कि 14 अप्रैल 2026 को अंबेडकर जयंती के अवसर पर इटावा के बुद्धा पार्क में ‘क्रांतिकारी जीता चमार स्मरण सभा’ आयोजित की जाएगी। आयोजकों ने इसमें बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने की अपील की है।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि चंबल घाटी हमेशा से अन्याय के खिलाफ खड़ी रही है और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में यह क्षेत्र क्रांति का प्रमुख केंद्र रहा। चकरनगर और भरेह रियासत द्वारा स्वतंत्र राज्य की घोषणा इसका प्रमाण है।