‘RSS की शाखाओं पर बैन लगा दो’: कॉन्ग्रेस चीफ खरगे के बेटे और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक ने सिद्धारमैया सरकार को लिखी चिट्ठी, जानें कब-कब संघ पर लगा है प्रतिबंध?

आरएसएस के 100 साल में तीन बार प्रतिबंध लगाने वाली कॉन्ग्रेस एक बार फिर प्रतिबंध लगाना चाहती है। ताजा प्रतिबंध कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे की सलाह पर कर्नाटक में लगाई जा सकती है।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और राज्य के मंत्री प्रियांक खरगे ने सीएम सिद्धारमैया को एक खत लिखा है। खत में उन्होंने सरकारी परिसर में आरएसएस की गतिविधियों पर बैन लगाने की माँग की है।

खत में लिखा गया है कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के परिसर, मैदान में आरएसएस को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। खत में ये भी कहा गया है कि सार्वजनिक पार्कों और धार्मिक ट्रस्ट द्वारा संचालित मंदिरों में भी आरएसएस के कार्यक्रम नहीं होने दी जानी चाहिए।

प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया है कि आरएसएस सरकारी स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ पार्कों में शाखाएँ चला रही है। उनके नारों से स्कूली बच्चों और युवाओं में नकारात्मक विचार उभरते हैं। सीएम ऑफिस ने इस खत को 12 अक्टूबर 2025 को सार्वजनिक किया।

प्रियांक खरगे ने लिखा, “जब समाज में नफरत फैलाने वाली विभाजनकारी ताकतें सिर उठाती हैं, तो हमारे संविधान के मूल सिद्धांत (एकता, समानता और अखंडता) हमें उन्हें रोकने का अधिकार देते हैं।’ उन्होंने लिखा कि देश के बच्चों, युवाओं और समाज के मानसिक स्वास्थ्य और विकास के हित में आरएसएस की सभी गतिविधियों को सरकारी परिसरों में प्रतिबंधित किया जाए।”

कब-कब कॉन्ग्रेस ने लगाया प्रतिबंध

कॉन्ग्रेस ने महात्मा गाँधी की हत्या के बाद पहली बार आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद इमरजेंसी के वक्त इंदिरा गाँधी की सरकार ने प्रतिबंध लगाया था और फिर 1992 में प्रतिबंध लगा।

इन प्रतिबंधों के बीच कॉन्ग्रेस सरकार ने भारत-चीन युद्ध में आरएसएस की भूमिका की सराहना भी की और गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में गृहमंत्रालय ने एक आदेश जारी करते हुए सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस के कार्यक्रमों में लगे रोक को हटा दिया। इसके लिए 1966,1970 और 1980 के तत्कालीन सरकारों के आदेशों में बदलाव किया गया। कॉन्ग्रेस ने सरकारी कर्मचारियों को संघ से दूर रखने के लिए ये प्रतिबंध लगाया था।

बीजेपी ने खरगे के प्रतिबंध के लिए लिखे खत पर कड़ी टिप्पणी की है। बीजेपी का कहना है कि प्रियांक खरगे कर्नाटक सरकार को खत लिखने वाले हैं कौन?