‘हिंदुओं को टुकड़ों में काट देंगे…’: कॉन्ग्रेस नेता मुकर्रम खान को राहत से कर्नाटक हाई कोर्ट का इनकार, कहा- ठोस मामला बनता, कार्रवाई नहीं रोकेंगे

कर्नाटक हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता मुकर्रम खान को बड़ी राहत देने से साफ मना कर दिया है। हिंदुओं के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के आरोपित मुकर्रम खान ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट की कलबुर्गी बेंच के जस्टिस राजेश राय के ने कहा कि रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों से साफ पता चलता है कि नेता के खिलाफ ठोस मामला बनता है। ऐसे में कानूनी कार्रवाई को बीच में नहीं रोका जा सकता।

क्या था पूरा मामला और विवादित बयान?

यह पूरा मामला फरवरी 2022 का है, जब कर्नाटक में हिजाब विवाद चरम पर था। 8 फरवरी 2022 को सेडम शहर में एक सभा के दौरान मुकर्रम खान ने बेहद आपत्तिजनक भाषण दिया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के मुताबिक, खान ने हिंदुओं को निशाना बनाते हुए कहा था, “जो हमारे बच्चों को हिजाब पहनने से रोकेंगे, उन्हें टुकड़ों-टुकड़ों में काट दिया जाएगा।” इस विवादित बयान के बाद 17 फरवरी 2022 को उनके खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं (153A, 298 और 295) के तहत FIR दर्ज की गई थी।

कोर्ट ने क्या टिप्पणियाँ कीं?

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि मुकर्रम खान ने जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई। कोर्ट ने चार्जशीट में मौजूद सबूतों और गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि आरोपित ने समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश की। कोर्ट ने माना कि हिजाब विवाद की आड़ में इस तरह की धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करना अपराध की श्रेणी में आता है।

सह-आरोपित को मिली राहत

जहाँ मुकर्रम खान पर मुकदमा जारी रहेगा, वहीं कोर्ट ने इस मामले के दूसरे आरोपित शोएब खान को राहत दे दी है। शोएब पर आरोप था कि उसने मुकर्रम खान को हैदराबाद में छिपने के लिए जगह दी थी ताकि वह पुलिस की पकड़ से बच सके। हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि शोएब के खिलाफ पेश किए गए दस्तावेज और आरोप केस चलाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए उसके खिलाफ कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।

आगे क्या होगा?

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब मुकर्रम खान के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में आपराधिक मुकदमा चलता रहेगा। उन पर धार्मिक नफरत फैलाने और समाज की शांति भंग करने के गंभीर आरोप हैं, जिसमें सजा का भी प्रावधान है।