पेरावूर सरकारी ITI में ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। राज्य भर के ITI कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पेरावूर ITI में ABVP के सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए।
चुनाव में के एम अश्वंथ को चेयरमैन, के अश्वंथ को जनरल सेक्रेटरी, एम पी स्मेजा को काउंसलर, पी शिवदत्त को मैगजीन एडिटर, सी अथुल को जनरल कैप्टन और ए आनंद को फाइन आर्ट्स सेक्रेटरी चुना गया।
ABVP नेताओं ने कहा कि कैंपस के छात्रों ने SFI सहित अन्य छात्र संगठनों की कथित छात्र-विरोधी नीतियों को खारिज करते हुए एकजुट होकर ABVP को चुना। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद SFI-CPM से जुड़े असामाजिक तत्वों ने कॉलेज आकर छात्रों और शिक्षकों को धमकाने की कोशिश की, लेकिन छात्र किसी भी तरह की धमकी से डरे बिना अपने फैसले पर अडिग रहे और ABVP को निर्विरोध जिताया।
यह भी उल्लेखनीय है कि पेरावूर–कन्नावम क्षेत्र का इतिहास ABVP कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजनीतिक हिंसा से जुड़ा रहा है। इसी इलाके में साल 2018 में ABVP कार्यकर्ता श्यामा प्रसाद की SDPI कार्यकर्ताओं द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। श्यामा प्रसाद कक्कायंगाड ITI के छात्र थे और कन्नावम के 17th माइल क्षेत्र में RSS शाखा के मुख्य शिक्षक भी थे। 19 जनवरी 2018 की शाम पेरावूर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत उनकी हत्या की गई थी।
पुलिस के अनुसार, ITI से घर लौटते समय कोमेरी के पास श्यामा प्रसाद को एक गिरोह ने घेर लिया। हमले के दौरान उन्होंने भागकर पास के एक घर में शरण लेने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा बंद मिला। इसके बाद हमलावरों ने घर के बरामदे में ही उन्हें पकड़कर धारदार हथियारों से हत्या कर दी।
इस मामले में पुलिस ने परक्कंदम निवासी मोहम्मद, मिनिक्कोल सलीम, नीवेली अमीर और पलायोड निवासी शाहिम सहित चार SDPI कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। हत्या के बाद आरोपित वायनाड भाग गए थे, जिन्हें बाद में पकड़कर पेरावूर लाया गया और मामला दर्ज किया गया।
इस हत्या के बाद भाजपा ने इस घटना को इस्लामिक-जेहादी चरमपंथ से जोड़ते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की थी और विरोध में कन्नूर जिले में 12 घंटे का बंद बुलाया गया था। श्यामा प्रसाद का अंतिम संस्कार पारियारम मेडिकल कॉलेज में पोस्टमॉर्टम के बाद किया गया, इससे पहले कई जगहों पर लोगों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।
ABVP नेताओं ने कहा कि मौजूदा चुनाव में छात्रों का निर्विरोध समर्थन उस राजनीति के खिलाफ साफ संदेश है जो डर और हिंसा के सहारे चलती है। उन्होंने इसे अतीत में अत्यधिक हिंसा झेल चुके इस क्षेत्र में लोकतांत्रिक साहस और छात्रों की जागरूकता एक बार फिर साबित हुई।

