कोलकाता के न्यू टाउन की घुनी झुग्गी बस्ती में बुधवार (17 दिसंबर 2025) शाम लगी भीषण आग अब राजनीतिक अखाड़ा बन गई है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि यह आग कोई हादसा नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की कार्रवाई से बचने के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) द्वारा रची गई एक सोची-समझी साजिश है, ताकि घुसपैठियों के नए दस्तावेज बनाए जा सकें।
भीषण आग और तबाही का मंजर
बुधवार (17 दिसंबर 2025) शाम करीब 7 बजे घुनी बस्ती में आग ने तांडव मचाया। देखते ही देखते 300 से ज्यादा झोपड़ियाँ राख हो गईं। धमाके इतने तेज थे कि लगा जैसे एक के बाद एक कई सिलेंडर फट रहे हों। कड़ाके की ठंड में सैकड़ों परिवार सड़क पर आ गए हैं। करीब 20 दमकल की गाड़ियों को आग बुझाने में घंटों लग गए, लेकिन तब तक सब कुछ जल चुका था।
अमित मालवीय का आरोप: ‘दस्तावेज जलाने की साजिश’
बीजेपी के आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि चुनाव आयोग जल्द ही अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को नोटिस भेजने वाला था। इससे ठीक पहले यह आग लग जाना कई सवाल खड़े करता है।
Days before the Election Commission of India (ECI) is set to begin hearings on notices to be served to illegal Bangladeshi and Rohingya settlers, a massive fire has broken out in the Ghuni slum near Eco Park, New Town.
— Amit Malviya (@amitmalviya) December 17, 2025
Ever since the SIR process began in West Bengal, visuals of… pic.twitter.com/J9FgALqOxF
अमित मालवीय के अनुसार, वोटर लिस्ट से हजारों नाम कटने के बाद TMC ने जानबूझकर यह आग लगवाई है। मकसद यह है कि बाद में लोग कह सकें कि “हमारे आधार, राशन कार्ड और वोटर आईडी आग में जल गए”, और इसी बहाने उनके नए फर्जी कागज बनवाकर उन्हें फिर से वोटर बनाया जा सके।
खाली झोपड़ियाँ और दमकल की देरी
मालवीय ने यह भी कहा कि इस इलाके में रहने वाले कई बांग्लादेशी पहले ही घर छोड़कर सीमा पार भाग चुके थे। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी आग लगने के बावजूद दमकल की गाड़ियाँ उतनी मुस्तैदी से क्यों नहीं भेजी गईं जितनी जरूरत थी? उनके मुताबिक, यह प्रशासन की नाकामी नहीं बल्कि एक सोची-समझी ‘मैनिपुलेशन’ (साजिश) है।
जाँच के घेरे में हादसा
एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हादसे की जाँच के आदेश दिए हैं, तो दूसरी तरफ इसे घुसपैठियों को बचाने का ‘फायर प्लान’ करार दिया है। फिलहाल बस्ती के लोग ठंड में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, लेकिन इस आग की तपिश ने बंगाल की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है।

