लद्दाख हिंसा के 2 दिन बाद कॉन्ग्रेस का दावा- फोटो में दिखा व्यक्ति पार्टी का पार्षद नहीं: ‘नकाबपोश’ की जाँच में जुटी पुलिस, पवन खेड़ा पत्रकारों को धमकाने में लगे

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की माँग को लेकर बुधवार (24 सितंबर 2025) को हुई हिंसा में कॉन्ग्रेस पार्षद फुंटसोग स्टैंजिन त्सेपाग के शामिल होने का दावा किया गया था। बीजेपी ने इसे लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और पार्टी नेताओं ने कॉन्ग्रेस पार्षद के कथित फोटो भी जारी किए थे।

सोशल मीडिया पर यह फोटो और वीडियो 2 दिनों तक खूब वायरल होते रहे। अब 2 दिन बाद कॉन्ग्रेस की नींद खुली है और उन्होंने इस दावे को गलत बताया है। कॉन्ग्रेस के पार्षद त्सेपाग का भी सफाई देते हुए एक वीडियो सामने आया है।

कॉन्ग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शुक्रवार (26 सितंबर 2025) को X पर एक पोस्ट कर दावा किया कि किसी अन्य शख्स की फुटेज दिखाकर उसे कॉन्ग्रेस पार्षद त्सेपाग बताया जा रहा है।

इस पूरे विवाद पर दो दिनों तक खामोश रहने के बाद कॉन्ग्रेस ने अब पत्रकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की भी धमकी दी है। पवन खेड़ा ने कहा, “हम उन सभी लोगों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्यवाही कर रहे हैं जिन्होंने हमारी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की है।”

इस बीच कॉन्ग्रेस पार्षद त्सेपाग का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह दावा कर रहा है कि उसके ऊपर लगे सभी आरोप झूठे हैं। गौरतलब है कि जिस दिन हिंसा हुई उसी दिन से कॉन्ग्रेस पार्षद का नाम सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था फिर भी कॉन्ग्रेस ने 2 दिन तक इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी और अब पार्टी पत्रकारों को धमका रही है।

कॉन्ग्रेस को जब उसी दिन यह स्पष्ट करना चाहिए था और अगर यह अफवाह थी तो इसे फैलने से रोकना चाहिए था लेकिन तक कॉन्ग्रेस और उसके पार्षद दोनों ही खामोश रहे। अब दो दिन बाद भी पवन खेड़ा ने ट्वीट तो किया है लेकिन खबर लिखे जाने तक ना तो कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ‘X’ हैंडल और ना ही पवन खेड़ा के X हैंडल से पार्षद का बयान शेयर किया गया है।

पार्षद का बयान शेयर करने के लिए भी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कुख्यात मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों का सहारा लिया जा रहा है। जुबैर ने अन्य ट्वीटस में हिंसा फैलाने वाले शख्स को पार्षद से अलग बताया लेकिन उसकी पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। जो शख्स हिंसा फैलाने में शामिल था वो किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़ा था यह भी अभी तक साफ नहीं हो पाया है।

सरकारी सूत्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि हिंसा के जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए ‘फेस रिकॉग्निशन सॉफ्टवेयर’ का इस्तेमाल किया जा रहा है और सभी उपलब्ध फुटेज की जाँच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पुलिस जाँच का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं कर सकती है।