उत्तर प्रदेश में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने एक बड़ा फैसला लेते हुए लखीमपुर खीरी जिले में 331 बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थी परिवारों को लैंड ओनरशिप के अधिकार पत्र वितरित किए। ये सभी लोग 1947 में देश के बंटवारे और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान विस्थापित होकर आए थे।
इसके साथ ही हजारों अन्य परिवारों और विकास परियोजनाओं से जुड़ी कई योजनाओं की शुरुआत भी की गई। सरकार का कहना है कि यह कदम वर्षों से लंबित भूमि अधिकारों को पूरा करने और प्रभावित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उठाया गया है।
बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों को मिला जमीन का अधिकार
लखीमपुर खीरी के मियांपुर गाँव, जिसे अब रविंद्रनगर नाम दिया गया है, 331 हिंदू परिवारों को भूमि के कानूनी अधिकार दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये परिवार आजादी के बाद से ही जमीन के अधिकार से वंचित थे।
सरकार का उद्देश्य इन परिवारों को स्थायी घर और कानूनी पहचान देना है ताकि वे सम्मान के साथ जीवन जी सकें। सीएम ने यह भी कहा कि पिछली सरकारों में इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे लोगों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
थारू समुदाय और विकास परियोजनाओं को बड़ी सौगात
इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पाली क्षेत्र में 4556 थारू जनजाति के परिवारों को भी भूमि अधिकार पत्र दिए। इसके अलावा लगभग 314 विकास परियोजनाओं की शुरुआत और उद्घाटन किया गया, जिनकी लागत सैकड़ों करोड़ रुपए है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य इलाके में सड़क, बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर वर्ग को उसका अधिकार देना और विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि थारू समुदाय और स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों के खिलाफ दर्ज कई पुराने मामलों को वापस लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में अब किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

