मुंबई से लगभग 80 किलोमीटर दूर विरार के कनेरफाटा जंगल में एक प्राचीन शिव मंदिर खतरे में है। यह मंदिर करीब 70 साल पुराना है और पिछले 50 वर्षों से यहाँ एक पुजारी पूजा-पाठ कर रहे हैं। अब जिस पहाड़ की चोटी पर यह मंदिर स्थित है, उसे खनन माफिया महबूब बलूच और फिरोज बलूच लगातार तोड़ रहे हैं।
पिछले साल दिवाली के आसपास, पहाड़ को चारों तरफ से घेर लिया गया था। खनन ठेकेदार महबूब बलूच और फिरोज बलूच ने वहाँ विस्फोटक का इस्तेमाल शुरू कर दिया। उन्हें पहले JCB मशीनों से खनन की अनुमति मिली थी, लेकिन उन्होंने कानून तोड़ा और जिलेटिन जैसे विस्फोटक लगाकर तेज़ी से पहाड़ काटना शुरू कर दिया।
मैनेजर आहिल खान ने पुजारी को धमकाया
अब स्थिति बहुत भयानक हो गई है। मंदिर के चारों ओर गहरे गड्ढे बन चुके हैं। मंदिर की दीवार और इन गड्ढों के बीच केवल एक से दो फीट की ज़मीन बची है। मंदिर की दीवारों में भी दरारें आ गई हैं। पुजारी को डर है कि किसी भी दिन मंदिर ढहकर खाई में समा सकता है।
जब पुजारी ने मंदिर को हो रहे नुकसान के बारे में विरोध किया, तो ठेकेदार के मैनेजर आहिल खान ने उन्हें धमकाया। मैनेजर ने कहा कि मंदिर को कहीं और शिफ्ट कर दिया जाएगा और चेतावनी दी कि बाहर किसी को भी विस्फोटकों के इस्तेमाल के बारे में न बताया जाए।
मीडिया की रिपोर्टिंग, प्रशासन की चुप्पी
मीडिया टीम ने मौके पर जाकर जिलेटिन से हो रहे धमाकों को रिकॉर्ड किया। जहाँ एक साल पहले पहाड़ था, वहाँ अब 50 फीट गहरी खाई बन चुकी है। मंदिर अब किसी भी वक्त गिर सकता है।
#DNAWithRahulSinha | गया पहाड़ खाई में.. महादेव भी खतरे में!
— Zee News (@ZeeNews) September 27, 2025
किसने..मुंबई के पास 'पहाड़' खा लिया ? #DNA #Mumbai #Temple #Mining | @RahulSinhaTV @Tyagiji0744 pic.twitter.com/7W5s7H0geC
प्रशासन की तरफ से इस अवैध खनन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पत्रकारों ने जब अधिकारियों से सवाल किया, तो तहसीलदार ने केवल ठेकेदारों को नोटिस भेजने की बात कहकर टाल दिया। विस्फोटक से पहाड़ तोड़ना पूरी तरह से गैरकानूनी है, फिर भी यह सब खुलेआम चल रहा है।
साजिश या सिर्फ खनन?
आसपास के गाँवों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि यह केवल अवैध खनन नहीं है, बल्कि कट्टरपंथियों द्वारा एक धार्मिक स्थल को साजिशन निशाना बनाया जा रहा है। एक तरफ पुजारी डरे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही इस 70 साल पुराने मंदिर के अस्तित्व पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। यह मामला बेहद गंभीर है और इस पर तुरंत सरकारी हस्तक्षेप की जरूरत है।

