मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की बड़ी कामयाबी, घरेलू LPG उत्पादन 60% तक पहुँचा: ईंधन का संकट टला

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और उससे उपजे वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक छलाँग लगाई है। सरकार की ओर से जारी आँकड़ों के अनुसार, भारत ने अपने घरेलू LPG (रसोई गैस) उत्पादन को तेजी से बढ़ाते हुए देश की कुल जरूरत का 60% हिस्सा खुद बनाना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि 18 मार्च 2026 तक यह उत्पादन केवल 40% के स्तर पर था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त भंडार है, जिससे आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।

सरकारी रिफाइनरियाँ फुल फॉर्म में, आपूर्ति हुई मजबूत

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 10 अप्रैल 2026 को जानकारी देते हुए बताया कि देश की सभी रिफाइनरियाँ वर्तमान में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि मिडिल ईस्ट के तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा सप्लाई चेन बेहद मजबूत है। युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपनी 60% जरूरत के लिए कतर, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर था, लेकिन अब घरेलू उत्पादन बढ़ने से यह विदेशी निर्भरता काफी कम हो गई है।

PNG पर शिफ्ट होने से मिली बड़ी राहत

सरकार ने गैस संकट से निपटने के लिए एक स्मार्ट रणनीति अपनाई और लोगों को LPG सिलेंडर से हटाकर PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की ओर प्रोत्साहित किया। पिछले चार हफ्तों में ही करीब 4 लाख उपभोक्ताओं ने अपने घरों में पाइप वाली गैस (PNG) का कनेक्शन लिया है।

इससे घरेलू LPG सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली है। इसके साथ ही, पिछले पाँच हफ्तों में लगभग 4.05 लाख नए LPG कनेक्शन सक्रिय किए गए हैं, जिससे नए परिवारों तक गैस की पहुँच सुनिश्चित हुई है।

छोटे सिलेंडरों की बढ़ी माँग और आसान नियम

आम लोगों और प्रवासी मजदूरों की सहूलियत के लिए सरकार ने 5 किलो वाले छोटे सिलेंडरों के नियमों में बड़ी ढील दी है। अब इन सिलेंडरों को लेने के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया (पेपरवर्क) को बहुत आसान बना दिया गया है।

इसका असर यह हुआ कि वर्तमान में बाजार में करीब 1 लाख छोटे सिलेंडरों की रोजाना बिक्री हो रही है। सरकार के इस कदम से उन लोगों को बड़ी राहत मिली है जो बड़े सिलेंडर का खर्च या कागजी कार्रवाई पूरी नहीं कर सकते थे।

कमर्शियल सप्लाई बहाल और प्राथमिकता वाले सेक्टर

युद्ध के शुरुआती दिनों में कमर्शियल LPG (होटल और उद्योगों के लिए) की सप्लाई पर थोड़ा असर पड़ा था, लेकिन अब यह 70% तक बहाल हो चुकी है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अस्पताल, स्कूल, दवा उद्योग (फार्मा) और पैकेजिंग यूनिट्स जैसे जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर गैस दी जाए। इसके अलावा, खाद (उर्वरक) क्षेत्र को भी 95% तक गैस की सप्लाई दी जा रही है ताकि खेती-किसानी पर कोई बुरा असर न पड़े।

आँकड़ों के मुताबिक, साल 2025-26 में भारत की कुल LPG खपत 33.21 मिलियन टन रही है। हालाँकि, युद्ध के कारण पिछले कुछ महीनों में खपत में गिरावट देखी गई है। जनवरी में जहाँ 3.012 मिलियन टन गैस खर्च हुई थी, वहीं मार्च में यह घटकर 2.379 मिलियन टन रह गई, जो करीब 26.6% की कमी है। सरकार ने अफवाहों को रोकने के लिए पिछले एक हफ्ते में 2400 से ज्यादा जागरूकता अभियान चलाए हैं, ताकि उपभोक्ताओं को गैस की उपलब्धता और सही स्थिति की जानकारी मिलती रहे।