केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने गहरे पानी और बहुत गहरे पानी से कच्चे तेल और नैचुरल गैस के प्रोडक्शन पर रॉयल्टी चार्ज कम कर दिया है। मंत्रालय ने 8 मई को बदले हुए रेट की अधिसूचना जारी कर दी। इस फैसले का मकसद भारत के एनर्जी सेक्टर को मजबूत करना है।
केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, ऑनशोर (जमीन पर होने वाले ) कच्चे तेल के प्रोडक्शन पर रॉयल्टी 16.66% से घटाकर 10% कर दी गई है।
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— CNBC-TV18 (@CNBCTV18Live) May 12, 2026
वहीं समुद्र में होने वाले ऑफशोर कच्चे तेल के प्रोडक्शन पर रॉयल्टी भी 9.09% से घटाकर 8% कर दी गई है। इसके अलावा, नया फ्लैट डिडक्शन फॉर्मूला लागू होने के बाद नैचुरल गैस पर रॉयल्टी रेट 10% से घटकर 8% हो गया है। इसका मतलब मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है कि अब तेल और गैस कंपनियों को सरकार को पहले के मुकाबले कम हिस्सा देना होगा और उनकी बचत में इजाफा होगा।
इसके अलावा जीएसटी से जुड़े कुछ फायदे भी इन्हें मिल सकते हैं। सरकार के इस फैसले पर ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे सरकार का बहुत बड़ा फैसला करार दिया है। CLSA का मानना है कि इससे ओएनजीसी की वैल्यू 7 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी हो सकती है, जबकि ऑयल इंडिया को 9 फीसदी से 11 फीसदी तक का फायदा मिल सकता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, रॉयल्टी चार्ज अब ‘वेल हेड प्राइस’ पर कैलकुलेट किया जाएगा, जिसमें वेल हेड के बाद की लागत में एक फिक्स्ड कटौती की अनुमति दी जाएगी, जो नॉमिनेशन रिजीम ब्लॉक के लिए बिक्री मूल्य का 20% और बाकी सभी रिजीम के लिए 15% होगी।
खास तौर पर, नए नियमों के तहत, गहरे पानी और बहुत गहरे पानी वाले इलाकों में डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड पॉलिसी और हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी के तहत दिए गए ब्लॉक से कच्चे तेल और कंडेनसेट प्रोडक्शन पर पहले सात सालों तक जीरो रॉयल्टी होगी।
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के मुताबिक, यह फैसला पिछले एक दशक से चल रहे उस प्रयास का नतीजा है, जिसका उद्देश्य जटिल नियमों की जगह सरल और एकरूप व्यवस्था लागू करना था। सरकार का मानना है कि इससे देश में एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी और घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ेगा।
इस फैसले से मुश्किल और ज्यादा निवेश वाले तेल और गैस फील्ड की खोज करने वाली कंपनियों की लागत कम करने में मदद मिलेगी। हालाँकि पश्चिम एशिया संकट ने न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के देशों को कई परेशानियों में डाल दिया है। भारत लंबे समय से घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़े इन्वेस्टमेंट लाने की कोशिश कर रहा है।
दरअसल सरकार का यह फैसला घरेलू तेल और गैस उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम साबित हो सकता है। इससे कंपनियों को नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करने में मदद मिलेगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

