नाइजीरिया के पूर्वोत्तर राज्य बोर्नो से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार (6 मार्च 2026) को हथियारों से लैस इस्लामी आतंकियों ने न्गोशे (Ngoshe) कस्बे पर धावा बोलकर 300 से अधिक लोगों का अपहरण कर लिया है। अगवा किए गए लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएँ और मासूम बच्चे शामिल हैं।
माना जा रहा है कि यह भीषण हमला नाइजीरियाई सेना द्वारा हाल ही में बोको हराम के तीन खूंखार कमांडरों को ढेर किए जाने के बदले में किया गया है। हालाँकि, अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने आधिकारिक तौर पर इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है।
सेना की कार्रवाई का प्रतिशोध?
ग्वोज़ा क्षेत्र के अधिकारी बुलामा सावा के मुताबिक, यह हमला सेना के उस सफल ऑपरेशन का नतीजा हो सकता है जिसमें आतंकियों के टॉप लीडर्स मारे गए थे। आतंकी अब हताशा में आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
सेना के प्रवक्ता उबा सानी ने बताया कि इसी हफ्ते बुधवार से शुक्रवार के बीच आतंकियों ने कोंडुगा, मार्टे और जकाना जैसे कई इलाकों में घुसपैठ की कोशिश की थी। सेना ने इन हमलों को नाकाम तो कर दिया, लेकिन इस बहादुरी भरी लड़ाई में एक सीनियर अधिकारी समेत कई जवान शहीद हो गए।
‘अदृश्य’ दुश्मन और आधुनिक तकनीक
जानकारों का कहना है कि नाइजीरियाई सेना के लिए इन आतंकियों से निपटना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। रक्षा विशेषज्ञ उल्फ लैसेंग के अनुसार, आतंकी ‘भूतों’ की तरह लड़ रहे हैं। वे मोटरसाइकिलों पर आते हैं, हमला करते हैं और सेना के पहुँचने से पहले ही घने जंगलों और झाड़ियों में गायब हो जाते हैं। इतना ही नहीं, अब ये आतंकी रेकी करने के लिए आधुनिक ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं और सीमा पार अन्य आतंकी गुटों से भी हाथ मिला रहे हैं।
खतरे में नाइजीरिया का भविष्य
नाइजीरिया इस वक्त बोको हराम, ISWAP और लाकुरावा जैसे कई खतरनाक समूहों के जाल में फँसा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिका ने भी अपनी सेना के सलाहकार यहाँ तैनात किए हैं।
संयुक्त राष्ट्र के आँकड़े बताते हैं कि इस हिंसा में अब तक हजारों बेगुनाह अपनी जान गँवा चुके हैं। स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति भारी गुस्सा है। उनका मानना है कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
क्या है बोको हराम?
बोको हराम का अर्थ है ‘पश्चिमी शिक्षा हराम है।’ यह संगठन नाइजीरिया में शरिया कानून लागू करना चाहता है और मॉडर्न एजुकेशन का कट्टर विरोधी है। साल 2014 में चिबोक स्कूल की 276 छात्राओं के अपहरण के बाद यह पूरी दुनिया में कुख्यात हो गया था।

