ओम बिरला ने अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद फिर से स्पीकर की कुर्सी पर 12 मार्च 2026 को बैठे। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल किसी की सदन का सबसे अहम वक्त होता है। इसमें व्यवधान नहीं डालना चाहिए। सदन की व्यवस्था बनाए रखना उनकी मजबूरी भी है और सदन के लिए जरूरी भी है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर की निष्पक्षता पर भी बात हुई। उन्होंने कहा, “मैंने निष्पक्ष तरीके से, नियमों के तहत सदन चलाने की कोशिश की। मैंने सदन की गरिमा बढ़ाने का प्रयास किया। सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर देने, निष्पक्ष तरीके से सदन की कार्यवाही का संचालन करने का प्रयास किया।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए विपक्ष का मजबूत होना बेहद जरूरी है।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, "चाहे सदन के नेता हो या विपक्ष के नेता या कोई भी मंत्री, सभी को नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सदन में बोलने का अधिकार है। कुछ लोगों का मानना है कि विपक्ष के नेता हमेशा बाकियों से ऊपर रहे हैं और किसी भी विषय पर बोल सकता है, किसी को यह विशेष… pic.twitter.com/FdjFCYybsx
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 12, 2026
अविश्वास प्रस्ताव के वक्त कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया था कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है और उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। इस पर स्पीकर ने कहा कि कोई भी नेता हो या नेता प्रतिपक्ष, हर किसी को नियमों के तहत ही बोलने का मौका दिया जा सकता है। प्रधानमंत्री भी सदन में किसी विषय पर बोलते हैं, तो वे भी पहले नोटिस देते हैं। कोई भी व्यक्ति नियमों से ऊपर नहीं है। दस्तावेजों को सदन की पटल पर रखने से पहले अनुमति जरूरी है।
कुछ सदस्यों ने निलंबन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि स्पीकर के रूप में सदन की प्रक्रिया लागू करना उनका दायित्व है और सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए कठोर फैसले लेने पड़ते हैं। चर्चा के दौरान ओम बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल होने की वजह से वो अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद धन्यवाद भी सदस्यों को नहीं दे पाए।
अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जिक्र करते हुए ओम बिरला ने कहा कि कुछ सदस्यों का कहना था कि विपक्ष के नेता किसी भी विषय पर बोल सकते हैं। लेकिन वह साफ करना चाहते हैं कि कोई भी नियमों से ऊपर नहीं हैं। सदन नियमों से चलता है और ये नियम मैंने नहीं बनाए हैं, बल्कि ये नियम विरासत में हमें मिले हैं। सदन किसी एक व्यक्ति का नहीं है। सदन सभी के लिए है और सभी के लिए नियम समान हैं।
स्पीकर ओम बिरला ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 1957 की घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि 1957 में तत्कालीन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान वाजपेयी जी जम्मू‑कश्मीर से जुड़े कुछ फोटो दिखाने चाहते थे, लेकिन उस समय के स्पीकर ने उन्हें रोका और कहा कि पहले तस्वीरें दिखाइए, तो उन्होंने पहले सारी तस्वीरें स्पीकर को दिखाई। इसके बाद अपनी बात कही। ये सदन की ‘मर्यादा’ का पालन करना होता है।

