‘संसद की हर आवाज का सम्मान’ लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने PM मोदी के भावुक पत्र की जमकर तारीफ की: कहा- पीएम निकालते हैं हर मुद्दे का समाधान

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनके नाम लिखे गए भावुक पत्र की भरपूर सराहना की है। रविवार (15 मार्च 2026) को प्रधानमंत्री के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पीकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर कहा कि पीएम मोदी संसदीय लोकतंत्र के नियमों प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति अटूट विश्वास रखते हैं। उन्होंने पत्र को लोक सेवा के उच्चतम नैतिक मूल्यों का प्रतीक बताया।

ओम बिरला ने लिखा, “भारत के संसदीय लोकतंत्र के नियमों प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति आपका हमेशा अटूट विश्वास रहा है। आपका पत्र लोक सेवा के उन उच्चतम नैतिक मूल्यों को व्यक्त करता है जिन्हें आपने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में जीया है वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में तथा इससे पूर्व गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में।” स्पीकर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री सदैव संसद की मूल प्रकृति संवाद तर्क और विचार-विमर्श में गहरा विश्वास रखते हैं।

बिरला ने जोर देकर कहा, “आप संसद में उठने वाली प्रत्येक आवाज को लाखों भारतीय नागरिकों की आवाज के रूप में सम्मान देते हैं। आप हमेशा संसदीय कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और संसद में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे का समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा।”

उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के नैतिक आधार को मजबूत करने वाले इस संदेश के लिए पीएम मोदी का हार्दिक आभार जताया।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (15 मार्च 2026) को ओम बिरला को पत्र लिखकर अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनकी निष्पक्षता धैर्य और नेतृत्व की सराहना की थी। पीएम मोदी ने लिखा था, “लोकसभा में आपके विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में खारिज हो गया। जिस प्रकार सदन ने स्पष्ट रूप से इस राजनीतिक कुकृत्य को अस्वीकार किया इसके लिए मैं सदन के सदस्यों को भी बधाई देता हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव के बाद ओम बिरला का बयान अत्यंत प्रभावशाली था जिसमें उन्होंने संसदीय इतिहास अध्यक्ष के दायित्व और नियमों की सर्वोच्चता का संतुलित उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं लेकिन असहमति और असम्मान के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए।

गौरतलब है कि 11 मार्च 2026 को कॉन्ग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को लोकसभा ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया था। 12 घंटे से अधिक चर्चा के बाद पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने इसे अस्वीकृत घोषित किया।