मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने को लेकर विपक्षी पार्टियाँ एक बार फिर सक्रिय हो गई हैं। विपक्ष की ओर से संसद में नया नोटिस लाने की तैयारी चल रही है।
बताया जा रहा है कि महिला आरक्षण बिल को गिराने के बाद विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होना चाहते हैं और इसी के बाद इस तरह के कदम को लेकर तैयारी चल रही है। हालाँकि इससे पहले भी ऐसा ही प्रयास किया गया था, जिसे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खारिज कर दिया था।
मार्च में विपक्ष द्वारा लाया गया पहला नोटिस करीब 193 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पेश किया गया था, लेकिन 7 अप्रैल को इसे अस्वीकार कर दिया गया। इस अस्वीकृति के बाद भी विपक्ष अब दोबारा नोटिस लाने की तैयारी में है और इस बार 200 से अधिक सांसदों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
CEC पर विपक्ष का आरोप
विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित हुई है और कई फैसले पक्षपातपूर्ण रहे हैं। हालाँकि इन आरोपों को लेकर अब तक कोई ठोस और प्रमाणित आधार सामने नहीं आया है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने की प्रक्रिया बेहद कठोर है, जो सुप्रीम कोर्ट के जज के महाभियोग के समान होती है।

