पाकिस्तान में मिला पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड साजिद जट्ट, ISI की मदद से हुलिया बदल कर रावलपिंडी में रह रहा: तस्वीर आई सामने

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी वारदात की बरसी से पहले इसके मास्टरमाइंड साजिद जट्ट का पता चल गया है। साजिद जट्ट पाकिस्तान में लगातार अपना हुलिया बदल कर रह रहा है। नाम और पता बदल रहा है, ताकि उसका सुराग भारत को न लगे।

आज तक के मुताबिक, पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकी गतिविधियों का नेटवर्क और हमलों की प्लानिंग करने वाले साजिद जट्ट की तस्वीर के साथ पूरी जानकारी सामने आई है। साजिद लश्कर और टीआरएफ के बड़े आतंकियों में से एक है।

वह पाकिस्तान में भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और अपने नाम और हुलिया को छुपाकर दुनिया की नजरों से बचते बचाते फिर रहा है। आज तक की टीम की पड़ताल में उसका असली घर और उसके पाकिस्तानी होने के अहम दस्तावेज सामने आए हैं।

इन सबूतों को वह दुनिया से अब तक छुपा कर रखा था। पहलगाम आतंकी हमले की जाँच में एनआईए ने मास्टरमाइंड का नाम साजिद जट्ट उर्फ सैफुल्लाह साजिद बताया था।

आज तक के मुताबिक, उसका असली नाम हबीबुल्लाह तबस्सुम है। इसके इशारों पर बैरसन घाटी में घूमने आए पर्यटकों पर गोलियाँ चलाई गई थी। एनआईए ने इसे आतंकी को मोस्ट वॉन्टेड की लिस्ट में रखते हुए इस पर 10 लाख रुपये का इनाम रखा था।

पहलगाम में मासूमों को मौत के घाट उतारने वाला कायराना हरकत के एक साल पूरे हो रहे हैं। इसका मास्टरमाइंड अब खुद को बचाते हुए भागता फिर रहा है। जाँच के दौरान वो आईडी कार्ड भी हाथ लगा है, जिससे उसके झूठ की पोल खुल गई है। इन कागजों से खुलासा होता है कि वह अपनी उम्र और नाम बदलकर पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में छिपने के ठिकाने बना रहा है।

कसूर की गलियों से लेकर रावलपिंडी के किराए के मकान तक। उसकी हर छिपने वाली जगहों का खुलासा जाँच में हो गया है। दुनिया की नजरों से बचता बचाता फिर रहा साजिद जट्ट पर पाकिस्तान के खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है। आईएसआई उसे हर जगह ‘आम लोग’ बनने में मदद कर रही है।

साजिद और उसके आकाओं को अज्ञात हमलावारों का खौफ सता रहा है, जो पाकिस्तान में घुसकर भारत के दुश्मनों को मार रहे हैं। यही वजह है कि खुद को छिपाने के लिए वह गलियों में साधारण घर में रह रहा है।

आज तक ने जो तस्वीरें जारी की है। उसमें साजिद एक साधारण घर में रह रहा है। पुराने कपड़ों में बहुत पुराने मोबाइल फोन पर बात करता नजर आ रहा है।

साजिद की पहचान का खुलासा दो अलग-अलग आईडेंटी प्रूफ से भी हुई है। पहला आईडेंटी प्रूफ 26 अप्रैल 2015 का है। इसमें उसका पता कसूर जिला और जन्म की तारीख 23 मार्च 1976 दर्ज है। जबकि दूसरे आईडेंटी प्रूफ में उसका पता इस्लामाबाद के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले जी-6 इलाका का दर्ज है। इस पहचान पत्र में साजिद ने बड़ी चालाकी से अपनी उम्र को 6 साल कम कर जन्म का साल 1982 दर्ज करवाया है।

दरअसल साजिद जट्टा का असली नाम हबीबुल्लाह तबस्सुम है और उसके पिता का नाम मोहम्मद रफीक है।