राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपितों के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके फ्रंट संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को एक कानूनी इकाई के रूप में आरोपित बनाया गया है। चार्जशीट में हमले के पीछे पाकिस्तान की साजिश, आतंकियों की भूमिका और उससे जुड़े ठोस सबूतों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
NIA द्वारा दाखिल की गई 1,597 पन्नों की चार्जशीट जम्मू स्थित NIA की विशेष अदालत में पेश की गई है। इसमें पाकिस्तान में बैठे कुख्यात आतंकी हैंडलर और लश्कर कमांडर साजिद जट्ट को मास्टरमाइंड बताया गया है। पहलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर पर्यटकों की हत्या कर दी थी जिसमें 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की जान आतंकियों ने ले ली थी। NIA के अनुसार यह हमला पूरी तरह से पाकिस्तान प्रायोजित था और इसे सीमा पार बैठे आतंकवादी आकाओं के निर्देश पर अंजाम दिया गया।
The National Investigation Agency (NIA) today chargesheeted seven accused in the Pahalgam terror attack case, including the Pakistan-based Lashkar-e-Taiba (LeT) / The Resistance Front (TRF) terrorist organisation.
— ANI (@ANI) December 15, 2025
The chargesheet, which details Pakistan’s conspiracy, roles of… pic.twitter.com/MICJowKZaz
चार्जशीट में उन 3 पाकिस्तानी आतंकियों के नाम भी हैं, जिन्हें इस हमले के कुछ ही हफ्तों बाद जुलाई 2025 में श्रीनगर के दाचीगाम क्षेत्र में ‘ऑपरेशन महादेव’ में भारतीय सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। इन आतंकियों की पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान, और हमजा अफगानी के रूप में की गई है। NIA के अनुसार ये तीनों पाकिस्तानी नागरिक थे और प्रतिबंधित LeT संगठन से जुड़े हुए थे।
जाँच एजेंसी ने इस मामले में दो स्थानीय आरोपितों परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथात का नाम भी चार्जशीट में शामिल किया है। दोनों को NIA ने 22 जून 2025 को आतंकियों को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान इन दोनों ने न केवल हमले में शामिल तीनों आतंकियों की पहचान की बल्कि यह भी पुष्टि की कि वे पाकिस्तानी नागरिक थे और सीधे तौर पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे।
चार्जशीट में आतंकियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा, NIA ने आतंकियों के खिलाफ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित दंडात्मक प्रावधान भी लगाए हैं।

