अदालत ने एक अंतरिम आदेश में पत्रकारों और विदेश से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों को भी निर्देश दिया कि वे अपने लेखों और सोशल मीडिया पोस्ट से कंपनी के खिलाफ अपमानजनक सामग्री हटा दें।
अडानी एंटरप्राइज लिमिटेड ने कोर्ट से आरोपितों की अपमानजनक सामग्री पर रोक लगाने की माँग की थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हिंडनबर्ग के खिलाफ जाँच का आदेश दिया था, जब यह पता चला था कि उन्होंने शॉर्टसेलिंग के उद्देश्य से अडानी के खिलाफ एक धोखाधड़ी की थी।
इस मामले में आरोपी हैं परंजॉय गुहा ठाकुरता, रवि नायर, अबीर दासगुप्ता, आयुष जोशी, अयस्कांत दास, बॉब ब्राउन फाउंडेशन, ड्रीमस्केप नेटवर्क इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, गेटअप लिमिटेड, डोमेन डायरेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (इंस्ट्रा के रूप में व्यापार) और जॉन डो।
अडानी एंटरप्राइज ने अदालत को बताया कि paranjoy.in, adaniwatch.org और adanifiles.com.au और दूसरे वेबसाइटों पर प्रकाशित सामग्री अपमानजनक थी और कंपनी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने और वैश्विक कारोबार को प्रभावित करने के इरादे से बनाए गए हैं।
अदालत ने न केवल अभियुक्तों को मानहानि वाली सामग्री पोस्ट करने से रोका है, बल्कि इस मामले पर आगे कोई भी सामग्री पोस्ट करने से भी रोका है। अदालत ने निर्देश दिया है कि यदि अभियुक्त आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो गूगल, एक्स, यूट्यूब आदि को मानहानि वाली सामग्री को हटाना होगा या उस तक पहुँच प्रतिबंधित करनी होगी।
मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2025 को निर्धारित की गई है।

