देश की राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट ने महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों को मंजूरी दे दी है, जिसे अब 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने की तैयारी है। खास बात यह है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है, जिसमें से करीब 273 सीटें अकेले महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लेख लिखकर इस फैसले को भारत की प्रगति के लिए मील का पत्थर बताया है।
करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों का आईना
PM मोदी ने अपने लेख में दिल छू लेने वाली बात कही है। उन्होंने लिखा कि महिला आरक्षण को सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया (कानून बनाना) समझना गलत होगा, बल्कि यह भारत की करोड़ों महिलाओं की उन आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है, जो वे बरसों से संजोए हुए हैं। PM ने कहा कि 16 अप्रैल 2026 को होने वाली संसद की विशेष बैठक इस ऐतिहासिक बदलाव की गवाह बनेगी।
समाज की प्रगति के लिए नारीशक्ति जरूरी
PM मोदी ने जोर देकर कहा कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब उसकी माताओं और बहनों को तरक्की के बराबर मौके मिलें। उन्होंने पिछले 11 वर्षों के कामकाज का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंक खातों (वित्तीय समावेशन) के जरिए महिलाओं के लिए एक मजबूत माहौल तैयार किया है। आज खेल के मैदान से लेकर सेना और विज्ञान तक, हर जगह महिलाएँ देश का नाम रोशन कर रही हैं।
भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, क्योंकि विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण वास्तविकता के करीब पहुंच रहा है।
— BJP (@BJP4India) April 9, 2026
यह कदम समावेशी निर्णय लेने की प्रक्रिया के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi द्वारा #NariShaktiVandan… pic.twitter.com/j9CgvneXP0
गवर्नेंस में सुधार और संवेदनशील लोकतंत्र
प्रधानमंत्री का मानना है कि जब महिलाएँ देश चलाने और बड़े फैसले लेने में शामिल होती हैं, तो उनका अनुभव और विजन प्रशासन को बेहतर बनाता है। PM मोदी ने अपने लेख में आगे लिखा, “महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह हमारे लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, संतुलित और जवाबदेह बनाने की एक कोशिश है।” इससे सरकार चलाने के तरीके (क्वालिटी ऑफ गवर्नेंस) में बड़ा सुधार आएगा।
सभी सांसदों से भावुक अपील
लेख के अंत में प्रधानमंत्री ने दलीय राजनीति से ऊपर उठकर एक भावुक अपील की है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से आग्रह किया है कि वे इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि हमें अपनी जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ इस दायित्व को पूरा करना चाहिए ताकि हमारी नारीशक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनका सही और उचित स्थान मिल सके।
क्या बदलेगा 2029 में?
नई योजना के मुताबिक, लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो 33 प्रतिशत आरक्षण के नियम से संसद में महिलाओं की भागीदारी अभी के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी। यह भारतीय संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित होगा।

