कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए माय फ्रेंड जैसे शब्दों का उपयोग करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (11 दिसंबर 2025) को फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।
हालाँकि इस बार पीएम मोदी ने ट्रंप के लिए माय फ्रेंड जैसे शब्दों से परहेज किया और लिखा कि प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ बहुत अच्छी और दिलचस्प बातचीत हुई। दोनों के बीच आई इस दूरी पर अब लोग चर्चा कर रहे हैं।
Had a very warm and engaging conversation with President Trump. We reviewed the progress in our bilateral relations and discussed regional and international developments. India and the U.S. will continue to work together for global peace, stability and prosperity.…
— Narendra Modi (@narendramodi) December 11, 2025
इससे पहले पीएम मोदी ने ट्रंप से हर मुलाकात या बातचीत में उनसे बेहतर रिश्ते दिखाने की कोशिश की थी। उनसे बातचीत के हर अंश में पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप के लिए ‘माय फ्रेंड’ उच्चारण का प्रयोग करते रहे हैं।


दोनों नेताओं के बीच क्या हुई बात?
मोदी और ट्रंप ने अपनी बातचीत में इंडिया-US कॉम्पैक्ट को लागू करने की दिशा में तेजी लाने पर जोर दिया। इसमें सैन्य सहयोग, व्यापार एवं तकनीकी साझेदारी, ऊर्जा, डिफेंस और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास शामिल हैं।
दोनों नेता बदलती वैश्विक परिस्थितियों, क्षेत्रीय चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी सहमत नजर आए कि भारत और अमेरिका साझा हितों की रक्षा के लिए साथ मिलकर काम करेंगे।
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हाई-स्टेक्स समिट कर लौटे हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत-अमेरिका बातचीत को काफी रणनीतिक माना जा रहा है।
संबंधों में क्यों आया बदलाव
ध्यान देने वाली बात ये है कि पीएम मोदी ने ट्रंप से महज एक दिन पहले ही इजरायली राष्ट्रपति नेतन्याहू से बातचीत के बारे में एक्स पर ही लिखा। नेतन्याहू के लिए पीएम मोदी ने माय फ्रेंड शब्द का ही उपयोग किया।

पीएम मोदी ने भारत-इजरायल साझेदारी को आगे बढ़ाने और आतंक के खात्मे पर एक साथ काम करने की बात कही।
अब अगर अमेरिका-भारत के बीच बात करें तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते इस समय तनाव में हैं। अमेरिका ने भारत द्वारा अधिक रूसी तेल खरीदने को लेकर आपत्ति जताते हुए अगस्त 2025 से भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा रखा है। 10–11 दिसंबर को इस मुद्दे पर बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आया था, लेकिन खास प्रगति नहीं हो पाई।
ट्रंप अक्सर अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत पर अलग-अलग आरोप लगाते नजर आते हैं। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से यह कहता रहा है कि भारत रूस को मदद दे रहा है, रूस-यूक्रेन युद्ध से फायदा उठा रहा है, और रूस के साथ अपने रिश्ते बढ़ा रहा है।
इन आरोपों की असल वजह यह है कि भारत रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदता है और फिर उसे रिफाइन करके यूरोपीय देशों को बेचता है, जबकि वही यूरोपीय देश रूस पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इस तरह भारत ने दुनिया में चल रहे ऊर्जा संकट को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
पहले अमेरिका ने भारत के इस कदम की तारीफ भी की थी, लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने अचानक इस पर नाराजगी दिखानी शुरू कर दी है।
पाकिस्तान से युद्ध के बीच सीजफायर का लिया क्रेडिट
18 जून 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी फौज के जनरल आसिम मुनीर ने व्हाइट हाउस में साथ में लंच किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत की। इस दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कराने का दावा किया।
साथ ही आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए कहा कि मध्यस्थता के दौरान पाकिस्तान ने भी काफी प्रभावी ढंग अपनाया। ट्रंप ने कहा कि इसमें आसिम मुनीर का खास नेतृत्व था। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान न्यूक्लियर देश हैं, इसीलिए वॉर रुकवा दिया।
ऐसा केवल एक बार नहीं हुआ बल्कि वे अक्सर इसका क्रेडिट लेते नजर आते हैं। जबकि भारत ने हमेशा इस बात से साफ इंकार किया है। बावजूद इसके ट्रंप ऐसा दावा करते कभी नहीं हिचकिचाते। यही वजह है कि अब पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कि ये दूरी साफ दिखने लगी है।

