प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (6 दिसंबर 2025) को हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट 2025 के 23वें संस्करण को संबोधित किया। इस समिट के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी और अनिश्चितताओं के बीच भी भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
उन्होंने बताया कि जब दुनिया की ग्रोथ करीब 3% और G7 देशों की 1.5% के आसपास है, तब भारत उच्च विकास और निम्न मुद्रास्फीति का मॉडल बनकर उभरा है। PM मोदी ने कहा कि पिछले दस सालों में भारत ने सिर्फ आँकड़ों में नहीं बल्कि सोच, आत्मविश्वास और आकांक्षाओं में भी बड़ा परिवर्तन किया है।
‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ पर बोले पीएम मोदी
पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ शब्दावली को लेकर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा, “आज भारत की जो तेज ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा, कहीं पर आपने सुना इसको कोई हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या?”
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ तब कहा गया जब भारत 2-3% की ग्रोथ के लिए तरस गया था। उन्होंने कहा कि किसी देश की इकोनॉमी ग्रोथ को उसमें रहने वाली आस्था से जोड़ना गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था और पूरे समाज को गरीबी का पर्याय बना दिया गया।
उन्होंने कहा, “ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि भारत की धीमी विकास दर का कारण हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है।” पीएम मोदी ने आगे कहा, “आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको ‘हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ’ में सांप्रदायिकता नजर नहीं आई. यह टर्म उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर का हिस्सा बना दिया गया।”
प्रधानमंत्री ने छोटे शहरों और गाँवों में तकनीकी पहुँच, MSME हब के उभार, किसानों के वैश्विक मार्केट से जुड़ने और भारतीय महिलाओं की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत में सुधार प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि निरंतर और राष्ट्रहित में हो रहे हैं।
पुरानी व्यवस्था पर निशाना साधते हुए PM मोदी ने कहा कि पहले सरकारें नागरिकों पर भरोसा नहीं करती थीं, वहीं आज स्वयं-प्रमाणित दस्तावेज भी मान्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब औपनिवेशिक सोच से मानसिक आजादी की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि बैंकों में नागरिकों का लगभग ₹78,000 करोड़ अनक्लेम्ड पड़ा है और हमारी सरकार देशभर में लोगों को ढूँढकर उन्हें पैसा पहुँचाने में जुटी हुई है। उन्होंने इंश्योरेंस कंपनियों के पास करीब ₹14,000 करोड़, म्युचुअल फंड में ₹3,000 करोड़ और डिविडेंट का ₹9,000 करोड़ अनक्लेम्ड होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 500 जिलों में कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं।

