अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (15 अक्टूबर 2025) को कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।
व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा,”मैं खुश नहीं था कि भारत रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन आज मोदी ने मुझे भरोसा दिलाया कि अब भारत ऐसा नहीं करेगा। यह एक बड़ा कदम है। अब हम चीन पर ध्यान देंगे ताकि वह भी रूस से तेल खरीदना बंद करे।”
ट्रंप ने यह भी माना कि भारत तुरंत तेल खरीदना नहीं रोक पाएगा, लेकिन उन्होंने कहा कि “यह एक प्रक्रिया है, जो जल्द ही पूरी हो जाएगी।” अमेरिका की कोशिश है कि रूस की सबसे बड़ी कमाई तेल निर्यात को रोका जाए।
WATCH: US President Trump said that Indian Prime Minister Modi told him that India will stop buying oil from Russia, a move Trump described as a ‘big step’ in efforts to isolate Moscow economically https://t.co/XT5x2PHfaZ pic.twitter.com/d2oWzX2sw4
— Reuters Asia (@ReutersAsia) October 16, 2025
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालाँकि, वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की है और मीडिया के सवालों पर कोई तत्काल जवाब नहीं दिया।
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए नए भारतीय राजदूत, सर्जियो गोर, ने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार और तकनीक जैसे मुद्दों पर बातचीत की थी। सर्जियो गोर को ट्रंप का करीबी माना जाता है और उनकी नियुक्ति को अमेरिका-भारत संबंधों के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जबकि चीन के मामले में वे अपेक्षाकृत नरमी बरत रहे हैं। अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही व्यापारिक तनाव है, जिस वजह से ट्रंप प्रशासन चीन पर वैसा ही दबाव नहीं बना रहा, जैसा भारत पर बना रहा है।
रूस से सबसे ज़्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में भारत और चीन सबसे आगे हैं। 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन भारत और चीन ने छूट पर मिलने वाला यह तेल खरीदना जारी रखा। इससे रूस की तेल से होने वाली कमाई बनी रही।
रिसर्च फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, रूस रोज़ाना करीब 3.35 मिलियन बैरल कच्चा तेल निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 1.7 मिलियन बैरल भारत और 1.1 मिलियन बैरल चीन खरीदता है। ट्रंप ने भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए इस साल भारत से अमेरिका आने वाले सामानों पर नए टैरिफ लगाए हैं।
पहले 25% टैक्स लगाया गया और फिर रूस से जुड़े तेल उत्पादों पर अतिरिक्त 25% टैक्स लगाया गया। यह कुल 50% टैरिफ 27 अगस्त से लागू हो गया है। भारत ने इन खरीदारियों का बचाव किया है। जुलाई में भारत के ऊर्जा मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि भारत की तेल खरीद ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने में मदद की और अमेरिका ने भी उस समय भारत की भूमिका की सराहना की थी।
Russia is one of the largest crude producers with over 9 million barrels/day. Imagine the chaos if this oil, amounting to about 10% of the global oil supply of around 97 million, vanished from the market. It would have forced the world to reduce its consumption, and since the… pic.twitter.com/yCxrTs4OuV
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) July 10, 2025
“अगर उस समय लोग या देश तेल खरीदना बंद कर देते, तो इसकी कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच जाती। उस स्थिति में हमें और खासकर हमारे अमेरिकी दोस्तों की तरफ से सलाह दी गई थी कि हम रूसी तेल खरीदें, लेकिन कीमत सीमा (प्राइस कैप) के अंदर रहकर।”
ट्रम्प का पूर्व दावा और भारत का खंडन
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। अगस्त 2025 में वॉशिंगटन डीसी में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था, “मेरी समझ के अनुसार भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। मैंने ऐसा सुना है, लेकिन मुझे नहीं पता कि यह सही है या नहीं। यह एक अच्छा कदम होगा। देखते हैं आगे क्या होता है।”
#WATCH | "I understand that India is no longer going to be buying oil from Russia. That's what I heard, I don't know if that's right or not. That is a good step. We will see what happens…" says, US President Donald Trump on a question by ANI, if he had a number in mind for the… pic.twitter.com/qAbGUkpE12
— ANI (@ANI) August 1, 2025
हालाँकि उस समय और उसके बाद भी भारतीय अधिकारियों ने इस तरह के किसी भी वादे से साफ इनकार किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बयान में कहा, “हम पहले ही इन मुद्दों पर अपना रुख साफ कर चुके हैं। हमारा तेल आयात बाजार की स्थितियों पर आधारित होता है और इसका मुख्य उद्देश्य 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा रहा है, जबकि कई अन्य देश भी अपने-अपने राष्ट्रीय हित में ऐसे ही कदम उठा रहे हैं।”
Statement by Official Spokesperson⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) August 6, 2025
? https://t.co/BNwLm9YmJc pic.twitter.com/DsvRvhd61D
हम एक बार फिर दोहराते हैं कि ये कदम अनुचित, अन्यायपूर्ण और असंगत हैं। भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
भारत का जवाब
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट और कड़ा जवाब दिया है।
भारत ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता केवल भारतीय जनता के हितों की रक्षा करना है और तेल आयात से जुड़ी नीतियाँ इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि भारत दुनिया का एक बड़ा तेल और गैस आयातक देश है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत का मकसद ऊर्जा की कीमतों को स्थिर बनाए रखना और आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की नीति अपनाई है। स्पष्ट शब्दों में भारत ने यह संकेत दिया कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही तेल आयात के फैसले लेता है। इस प्रकार, भारत ने ट्रंप के बयान को सिरे से खारिज करते हुए अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दोहराया है।

