भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 अक्टूबर 2025 को केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन किए। राष्ट्रपति मुर्मू यह दर्शन करने वाली पहली राष्ट्राध्यक्ष बनी हैं। उन्होंने मंदिर पहुँचने से पहले पंपा नदी में पैर धोकर पारंपरिक ‘इरुमुडी केट्टू’ अनुष्ठान किया। यह अनुष्ठान अयप्पा भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। अनुष्ठान के बाद, देवस्वम अधिकारियों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
#WATCH | President Droupadi Murmu offers prayers at Sabarimala Temple in Kerala
— ANI (@ANI) October 22, 2025
(Source: PRD, Kerala) pic.twitter.com/HnX0ITjYFA
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू सुबह 11:45 बजे सबरीमाला पहुँचीं और मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने के लिए पवित्र 18 सीढ़ियाँ चढ़ीं। मुर्मू ने भगवान अयप्पा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा की। इसके बाद उन्होंने मलिकप्पुरम और वावरुस्वामी के मंदिरों में भी दर्शन किए। यह दौरा दोपहर 12:15 बजे पूरा हुआ।
She is 67.
— Bandi Sanjay Kumar (@bandisanjay_bjp) October 22, 2025
She broke no rules, hurt no faith – she only honoured it.
In doing so, she became the first President ever to carry the Irumudi and bow before Lord Ayyappa.
Hon’ble President Smt Droupadi Murmu Ji’s visit to Sabarimala reminds us that devotion doesn’t shout, it… pic.twitter.com/v0saoEZwPJ
गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने इरुमुडी ले जाकर भगवान अयप्पा के सामने शीश नवाया है, जो करोड़ों भक्तों की गहरी आस्था को दर्शाता है। यह यात्रा भक्ति की गरिमा को दिखाती है।
दर्शन के दौरान राष्ट्रपति ने सर पर क्या रखा था?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सबरीमाला मंदिर के दर्शन के दौरान सिर पर ‘इरुमुडी’ रखा था, जो एक पारंपरिक पोटली है। यह पोटली भक्तों द्वारा सबरीमाला तीर्थ यात्रा में लिया जाता है। यह पोटली भक्त के आध्यात्मिक समर्पण और तपस्या का प्रतीक मानी जाती है। इरुमुडी दो हिस्सों में बँटी होती है। पहला- मुनमुडी, जिसमें भगवान अयप्पा और अन्य देवताओं के लिए प्रसाद रखा जाता है और दूसरा- पिनमुडी, जिसमें यात्रा के दौरान जरूरी सामान होते हैं।
इसमें घी भरा नारियल सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसे भगवान को अर्पित किया जाता है। इस पोटली का उद्देश्य भक्त के भीतर की सांसारिक इच्छाओं को त्याग कर आध्यात्मिक शुद्धता की ओर बढ़ना है। इरुमुडी को लेकर भक्तों को सबरीमाला की 18 पवित्र सीढ़ियाँ चढ़ने का एक अनिवार्य चरण माना जाता है। यह पोटली न केवल यात्रा की तैयारी का हिस्सा है, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच अटूट संबंध का भी प्रतीक है।

