पंजाब कैबिनेट ने बेअदबी पर सख्त कानून को दी मंजूरी, उम्रकैद और ₹25 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान: AAP सरकार ने बताया- क्यों सिर्फ गुरु ग्रंथ साहिब पर होगा लागू

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में शनिवार (11 अप्रैल 2026) को हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन बिल 2026’ को मंजूरी दे दी। इस बिल में गुरु ग्रंथ साहिब के खिलाफ बेअदबी करने वालों के लिए सख्त सजा तय की गई है।

इसके तहत कम से कम 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। प्रस्तावित कानून में 5 लाख रुपए से 25 लाख रुपए तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। साथ ही, दोषी पाए जाने वालों की संपत्ति जब्त करने का अधिकार भी सरकार को दिया गया है। यह बिल सोमवार को होने वाले विशेष विधानसभा सत्र में पेश किया जा सकता है।

व्यापक की गई बेअदबी की परिभाषा

इस बिल में किए गए संशोधन के तहत बेअदबी की परिभाषा को बढ़ा दिया गया है। अब इसमें ऐसे शब्द (बोले या लिखे गए), संकेत या किसी भी तरह की दिखाई देने वाली प्रस्तुति, खासकर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए, जो सिखों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाए, उन्हें भी बेअदबी माना जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन व्यक्तियों, संस्थानों या गुरुद्वारा समितियों को गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप (फिजिकल कॉपी) आधिकारिक रूप से दिए गए हैं, वे उसकी सुरक्षा और सिख रहत मर्यादा के पालन के लिए भी जिम्मेदार होंगे।

गौरतलब है कि 2008 के ‘जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट’ के तहत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाशन का विशेष अधिकार दिया गया था। अब इस संशोधन के तहत SGPC को यह भी कानूनी रूप से बाध्य किया जाएगा कि वह सभी स्वरूप का रिकॉर्ड रखे, जिसमें मैन्युअल और इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरह का डेटा शामिल होगा। इसका उद्देश्य उन घटनाओं को रोकना है जैसे पहले स्वरूप के गायब होने के मामले जिनसे विरोध प्रदर्शन और बड़े विवाद हुए थे।

सख्त कानून की जरूरत थी: AAP सरकार

एक बयान में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्य सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को कड़ी सजा दी जा सके। उन्होंने कहा कि कई बार असली साजिश रचने वाले लोग मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों का इस्तेमाल करके ऐसे काम कराते थे और खुद बच निकलते थे। नया कानून ऐसे लोगों को भी सजा देने के लिए बनाया गया है, जो इन घटनाओं की साजिश करते हैं।

चीमा ने यह भी कहा कि पहले हुई कई बेअदबी की घटनाओं से लोगों की भावनाएँ बहुत आहत हुईं और अशांति का माहौल बना। उन्होंने बताया कि मौजूदा भारतीय न्याय संहिता के तहत जो प्रावधान हैं, वे इतने सख्त नहीं हैं। इसलिए मजबूत कानूनी उपायों की जरूरत महसूस की गई।

जब उनसे पूछा गया कि इसमें अन्य धर्मों के पवित्र ग्रंथों को क्यों शामिल नहीं किया गया तो उन्होंने कहा कि सिख धर्म में गुरु ग्रंथ साहिब को जीवित गुरु माना जाता है और इसकी तुलना किसी अन्य ग्रंथ से नहीं की जा सकती। उन्होंने ‘पंजाब प्रिवेंशन ऑफ ऑफेंसेज अगेंस्ट होली स्क्रिप्चर बिल 2025’ का भी जिक्र किया जो फिलहाल एक सिलेक्ट कमेटी के पास विचाराधीन है।

हालाँकि, इस संशोधन को लाने के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले चार साल में राज्य सरकार ने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ कानून को मजबूत करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया था जबकि AAP के नेताओं ने पिछली विधानसभा चुनाव के समय ऐसे कदम उठाने का वादा किया था। अब जब पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 की पहली तिमाही में होना है, तो इस फैसले के समय पर भी चर्चा हो रही है।