लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी के फतेहपुर दौरे को लेकर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, राहुल गाँधी शुक्रवार (17 अक्टूबर 2025) को कानपुर के चकेरी एयरपोर्ट से हरिओम वाल्मीकि के परिवार से मिलने फतेहपुर पहुँचे थे। अब दावा किया जा रहा है कि जिस गाड़ी से राहुल गाँधी फतेहपुर पहुँचे थे वो बसपा नेता पिंटू सेंगर की हत्या के एक आरोपित वीरेंद्र पाल की थी।
सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी की इस यात्रा के कई वीडियो भी सामने आए हैं जिसमें वह सफेद रंग की ‘UP-78 HV-8333’ नंबर वाली इनोवा कार से यात्रा करते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह कार वीरेंद्र पाल के नाम पर रजिस्टर्ड है।
राहुल गांधी की गाड़ी को लेकर विवाद!
— News1India (@News1IndiaTweet) October 18, 2025
राहुल गांधी की फतेहपुर यात्रा में विवाद
हत्या के आरोपी की कार में सफर करने का आरोप
पिंटू सिंगर हत्याकांड के आरोपी की थी कार #RahulGandhi #Congress #BreakingNews pic.twitter.com/CwRYCCEWaN
जब इस वायरल वीडियो पर हंगामा हुआ तो कॉन्ग्रेस नेताओं के अपनी सफाई दी है। कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष (ग्रामीण) संदीप शुक्ला ने दावा किया कि राहुल गाँधी के काफिले की यह गाड़ी एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से बुक की गई थी।
शुक्ला ने कहा, “गाड़ी ट्रैवल एजेंसी से मँगाई गई थी, मुझे नहीं पता कि यह किसकी थी।” उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरे के लिए कुल तीन गाड़ियाँ बुक की गई थीं और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह इनोवा गाड़ी कैसे मुहैया कराई गई।
विवाद बढ़ने के बाद पुलिस और लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) ने मामले की जाँच शुरू कर दी। वे यह पता लगा रहे हैं कि वीरेंद्र पाल की गाड़ी राहुल गाँधी के दौरे के लिए कैसे बुक हुई और किस ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से यह मुहैया कराई गई थी।
पिंटू सेंगर की हत्या और वीरेंद्र पाल
राहुल गाँधी ने जिस गाड़ी से यात्रा की है वो वीरेंद्र पाल के नाम पर है और यह अगस्त 2024 में खरीदी गई थी। गाड़ी के रजिस्टर्ड रिकॉर्ड के मुताबिक, गाड़ी शिवप्रसाद पाल के पुत्र वीरेंद्र पाल के नाम पर कानपुर RTO में दर्ज है। साथ ही रिकॉर्ड में ‘181-C, आदर्श नगर, जेके कॉलोनी, तिवारीपुर, शिवन्स टैनरी, कानपुर’ पता लिखवाया गया है।
जून 2020 में बसपा नेता पिंटू सेंगर की हत्या कर दी गई थी और वीरेंद्र पाल हत्या में मुख्य आरोपितों में से एक है। पिंटू सेंगर की 20 जून 2020 को कानपुर की जेके कॉलोनी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस जाँच में पता चला कि वीरेंद्र पाल और उनके साथी कथित तौर पर सेंगर की हत्या की साजिश में शामिल थे। आरोपितों ने कथित तौर पर शूटरों को 43 लाख रुपए दिए थे।
पीड़ित के भाई धर्मेंद्र सेंगर के अनुसार, वीरेंद्र ने रियल एस्टेट व्यवसाय में विवाद के चलते हत्या का आदेश दिया था और खुद भी हत्यारों को 5 लाख रुपए दिए थे। वीरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया लेकिन 18 महीने बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया था।

